
झुंझुनूं. jhunjhununews : खेतड़ी उपखंड के रवां गांव निवासी महेश चन्द्र मीना ने रिन्यूएबल ऊर्जा स्रोतों की बिजली की खपत का पता लगाने के लिए डिवाइस बनाया है। इस डिवाइस के डिजाइन का मीणा ने पेटेंट भी करवा लिया है। दिल्ली विश्वविद्यालय में रसायन शास्त्र विभाग के प्रोफेसर महेश मीना ने बताया कि इस डिवाइस का डिजाइन रिन्यूएबल ऊर्जा को नियंत्रित करने के लिए किया गया है। जिसमें वास्तविक समय की निगरानी के लिए सेंसर की बहुलता का उपयोग किया है।
इस डिवाइस से रिन्यूएबल ऊर्जा की खपत की भविष्यवाणी के साथ-साथ बिजली की खपत की मात्रा का विश्लेषण किया जा सकता है। डिवाइस को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत से प्राप्त इनपुट और खपत तथा भविष्य में अनुमानित आवश्यकता का विश्लेषण करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इससे ऊर्जा खपत को नियंत्रित किया जा सकता है। इस डिवाइस का उपयोग सौर ऊर्जा संयंत्र में किया जा सकेगा।डिवाइस को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत से प्राप्त इनपुट और खपत तथा भविष्य में अनुमानित आवश्यकता का विश्लेषण करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इससे ऊर्जा खपत को नियंत्रित किया जा सकता है। इस डिवाइस का उपयोग सौर ऊर्जा संयंत्र में किया जा सकेगा। महेश मीना को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर सोलर ऊर्जा में अनुसंधान के लिए पहले भी सम्मानित किया जा चुका है।
बढ़ रहा सौर ऊर्जा का उपयोग
भारत की भौगोलिक स्थिति ऐसी है जहां पूरे साल में औसतन 300 दिनों धरती पर धूप आती है । भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य स्वर्णिम है। बिजली उत्पन्न करने के लिए पारम्परिक संसाधनों जैसे कोयला, पेट्रोलियम, जीवाश्म आदि का उपयोग करना हर दिन महंगा होता जा रहा है। बढ़ती महंगाई की वजह से लोगों के लिए बिजली ख़र्च भी ऐसी समस्या बन गयी है जिससे छुटकारा पाना बहुत ज़रूरी है। इन्ही बातों को ध्यान में रखते हुए लोग बिजली उत्पादन के लिए सौर ऊर्जा के प्रति जागरूक हो रहे हैं। राज्य तथा केंद्र सरकारें भी सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए सुविधाएं प्रदान कर रही हैं। घरों के अलावा लोग ऑफिस, खेतों आदि में भी सौर ऊर्जा से उत्पन्न बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं।