
झुंझुनूं। जिले के उदयपुरवाटी क्षेत्र के छापोली गांव में हुए दर्दनाक हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। जिस रास्ते को बनवाने के लिए गांव के लोगों ने आपस में चंदा जुटाया, उसी सड़क का निर्माण आठ परिवारों के लिए कभी न भूलने वाला दर्द बन गया। ग्रामीण सीमेंट मिक्सर मशीन को धक्का देकर दूसरी जगह ले जा रहे थे, तभी मशीन ऊपर से गुजर रही 11 हजार केवी की बिजली लाइन के संपर्क में आ गई। देखते ही देखते करंट की चपेट में आए आठ लोगों की जान चली गई। हादसे में सड़क निर्माण का काम करने वाले ठेकेदार विष्णु सैनी की भी मौत हो गई।
छापोली गांव में हुए इस हादसे की कहानी सिर्फ आठ मौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे ग्रामीणों की मेहनत, आपसी सहयोग और एक अधूरे रास्ते को पूरा करने की कोशिश से भी जुड़ी है। ग्रामीणों के मुताबिक, तीर्थस्थल कदम कुंड जाने वाला रास्ता लंबे समय से खराब था। गांव के लोगों ने सरकारी मदद का इंतजार करने के बजाय आपस में चंदा इकट्ठा कर सीसी सड़क बनवाने का फैसला किया। करीब तीन-चार महीने से निर्माण कार्य चल रहा था, लेकिन बीच-बीच में रुक जाता था। सोमवार को भी काम दोबारा शुरू हुआ था। ग्रामीणों ने बताया कि ठेकेदार विष्णु सैनी से हाथ जोड़कर काम शुरू करवाया था।
निर्माण कार्य के दौरान सीमेंट मिक्सर मशीन को दूसरी जगह ले जाने की जरूरत पड़ी। घायल गिदाराम सैनी के अनुसार, मशीन को सभी लोग मिलकर धक्का देकर आगे ले जा रहे थे। इसी दौरान मशीन ऊपर से गुजर रही 11 हजार केवी की हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आ गई। मशीन में करंट दौड़ते ही आसपास मौजूद मजदूर और ग्रामीण इसकी चपेट में आ गए। हादसे में आठ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल हो गए।
मृतकों में ठेकेदार विष्णु सैनी (38) भी शामिल था। उसके अलावा हरिराम गुर्जर (30), मंगलचंद गुर्जर (22), कालूराम गुर्जर (29), पवन गुर्जर (23), सुरेंद्र उर्फ सुरेश सैनी (30), मुकेश सैनी (27) और नितेश सैनी (32) की जान चली गई।
हादसे के बाद ग्रामीणों ने बिजली विभाग और प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए। उनका कहना है कि 11 हजार केवी की लाइन पहले सड़क से दूर थी, लेकिन कुछ दिन पहले इसे बदलकर रास्ते के ऊपर से निकाल दिया गया। ग्रामीणों के मुताबिक, बिजली के तार काफी नीचे थे। उन्होंने बिजली बंद करवाने के लिए फोन भी किया था, लेकिन जीएसएस पर कर्मचारी मौजूद नहीं था। ग्रामीणों अने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण का काम पहले भी दो बार रुकवाया गया था। इसके बाद ग्रामीणों ने हाथ जोड़कर दोबारा काम शुरू करवाया था। अब उसी काम के दौरान इतना बड़ा हादसा हो गया।
हादसे के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने शवों मौके पर रखकर धरना शुरू कर दिया। ग्रामीणों की मांगों को लेकर 21 सदस्यीय संघर्ष समिति बनाई गई। स्थिति को देखते हुए गांव में पुलिस के साथ आरएसी के जवान भी तैनात किए गए। स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा मौके पर पहुंचे और संघर्ष समिति के सदस्यों से बातचीत की। कदम कुंड क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के कारण मंत्री और पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी मोटरसाइकिल से स्टेट हाईवे पहुंचे। वहां से मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क कर मृतकों के परिजनों की मांगों और हादसे की जानकारी दी। मंत्री ने पहले अस्पताल पहुंचकर घायलों का हाल भी जाना।
हादसे में घायल महेंद्र सैनी, गीता देवी, संतरा देवी, गिदाराम सैनी और मंजू देवी का उपचार चल रहा है। सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपए और घायलों के परिजनों को 50-50 हजार रुपए की सहायता देने की जानकारी दी गई। पूर्व मंत्री राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने प्रत्येक मृतक परिवार को 20 से 25 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की मांग उठाई। आठ लोगों की मौत के बाद छापोली में मातम पसरा है।