
झुंझुनूं। दीपावली की खुशियों से पहले आठ घरों में ऐसा अंधेरा छाया कि अब वहां कभी उजाला नहीं होगा। जिन घरों में त्योहार की तैयारियां होनी थीं, वहां अपनों के शव पहुंचने का इंतजार था। किसी मां ने अपना जवान बेटा खोया तो किसी पत्नी का सुहाग उजड़ गया। किसी पिता के बुढ़ापे का सहारा छिन गया तो किसी परिवार के बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। सोमवार सुबह छापोली के कदम कुंड मार्ग पर हुए भीषण हादसे में आठ श्रमिकों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। हादसे के बाद जब उदयपुरवाटी सीएचसी में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी हुई और एक साथ आठ शव मोर्चरी से बाहर निकले तो वहां मौजूद लोगों की आंखें छलक पड़ीं। हर तरफ सिसकियां थीं और अपनों को खोने का दर्द था।
हादसे के बाद मृतकों के शव उदयपुरवाटी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाए गए थे। ग्रामीणों और प्रशासन के बीच वार्ता में सहमति बनने के बाद सभी आठ शवों का पोस्टमार्टम करवाया गया। जैसे ही पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सुपुर्द किए गए। एक साथ आठ शव बाहर निकलते देख वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। परिजन अपनों के शवों को देखकर बिलखते रहे। जिन हाथों से परिवार का पालन-पोषण होता था, उन्हीं हाथों को अब हमेशा के लिए विदा करना पड़ा। परिजन शव लेकर अपने गांवों और घरों की ओर रवाना हुए। देर शाम सभी मृतकों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
आठ श्रमिकों की मौत के बाद ग्रामीणों में गहरा आक्रोश था। मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता, परिवार के सदस्य को नौकरी और अन्य मांगों को लेकर ग्रामीण धरने पर बैठ गए। प्रशासन से बातचीत के लिए 21 सदस्यीय संघर्ष समिति का गठन किया गया। समिति के सदस्यों ने मंत्री झाबर सिंह खर्रा और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ वार्ता की। ग्रामीणों का कहना था कि हादसे में जान गंवाने वाले सभी श्रमिक अपने परिवारों के कमाने वाले सदस्य थे। ऐसे में उनके जाने के बाद परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
करीब सात घंटे चली वार्ता के बाद सरकार और ग्रामीणों के बीच विभिन्न मांगों पर सहमति बनी। मृतकों के आश्रितों को सरकार की अलग-अलग योजनाओं के माध्यम से 15-15 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दिलाने पर सहमति बनी। इसके साथ ही प्रत्येक मृतक परिवार के एक सदस्य को निकाय विभाग में संविदा पर नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया गया। कदम कुंड मंदिर तक जाने वाले रास्ते को वन विभाग से कन्वर्जन कराने की मांग पर भी सहमति बनी, जिससे सड़क निर्माण और आवागमन की समस्या का समाधान हो सके। मांगों पर सहमति बनने के बाद ग्रामीणों ने करीब सात घंटे बाद धरना समाप्त कर दिया।