पंचायत समिति मंडावा के अंतर्गत आने वाले करीब 400 घरों की आबादी वाले मौजावास गांव में सरकारी रिकॉर्ड की बड़ी खामी सामने आई है। एक ही गांव का नाम अलग-अलग विभागों के दस्तावेजों में अलग-अलग दर्ज होने से ग्रामीणों और विद्यार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मंडावा (झुंझुनूं)। पंचायत समिति मंडावा के अंतर्गत आने वाले करीब 400 घरों की आबादी वाले मौजावास गांव में सरकारी रिकॉर्ड की बड़ी खामी सामने आई है। एक ही गांव का नाम अलग-अलग विभागों के दस्तावेजों में अलग-अलग दर्ज होने से ग्रामीणों और विद्यार्थियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गांव का नाम कहीं मौजावास, कहीं मोजावास तो कहीं मौजास या मोजास लिखा हुआ है। इतना ही नहीं, कई दस्तावेजों में तो संयुक्त रूप से दो नाम भी दर्ज हैं।
स्थिति यह है कि राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, ग्राम पंचायत कार्यालय और पशु चिकित्सालय, तीनों एक ही स्थान पर स्थित हैं, लेकिन तीनों पर गांव का नाम अलग-अलग लिखा हुआ है।
ग्रामीणों के अनुसार शिक्षा संबंधी रिकॉर्ड में कहीं मौजावास तो कहीं मौजास दर्ज है, जबकि आधार कार्ड, राशन कार्ड, जन आधार, पैन कार्ड, निर्वाचक नामावली और राजस्व रिकॉर्ड में भी नामों का यही असमंजस बना हुआ है। ग्रामीण हरिराम सैनी, अमरसिंह शेखावत, मदनलाल, विद्याधर राहड़, जीवणराम, भागीरथ जांगिड़, बाबूलाल कांटीवाल और कृष्ण शर्मा का कहना है कि गांव में शायद ही कोई व्यक्ति होगा, जिसके सभी दस्तावेजों में गांव का नाम एक जैसा हो।
नामों की इस गड़बड़ी का सबसे ज्यादा असर विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और नौकरी के आवेदन में दस्तावेजों का मिलान नहीं होने से बार-बार दिक्कत आती है। कई बार ऑनलाइन पोर्टल पर डेटा मैच नहीं होने के कारण आवेदन ही सबमिट नहीं हो पाता, जिससे योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता।
ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरी तरह प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है, लेकिन इसकी कीमत उन्हें आर्थिक और मानसिक रूप से चुकानी पड़ रही है। दस्तावेज सुधार के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
यह गांव चार शताब्दी से भी अधिक पुराना है। इस गांव के लोग मूंज की (जेवड़ी) रस्सी बेचने झुंझुनूं जाते थे। तब गांव के संदर्भ में एक साखी ( कविता ) बोली जाती थी जिसमें भी गांव का नाम मौजावास है। कविता में लिखा गया है ‘मुरगा पहली मोगरी बाजी मौजावास, बांटी कूटी बल भरी, बल की बानी भारी ( पिंडी ), मुंज पुकारी झुंझुनूं जद खान जादा ख्यारी।’
-डॉ. हनुमान सिंह शेखावत, बुजुर्ग
फरवरी 2019 में प्रकाशन हुई निर्वाचक नामावली में गांव का नाम मौजास लिखा है। जबकि ग्राम पंचायत चुनाव के लिए सन् 2020 में प्रकाशन हुई निर्वाचक नामावली में गांव का नाम मोजावास अंकित है। राउमावि के सामने स्थति राजकीय पशु चिकित्सालय भवन पर मोजास, ग्राम पंचायत कार्यालय पर मोजावास लिखा है। नाम सभी दस्तावेजों में एक हीं होना चाहिए।
-सुभाष मीठारवाल, बीएलओ, राउमावि
मेरे राशन कार्ड में गांव का मौजास, ड्राइविंग लाइसेंस में मोजावास, आधार कार्ड में मोजास लिखा है। तहसील कार्यालय से जारी जमाबंदी में मौजास तथा मूल निवास प्रमाण पत्र में मौजास व मौजावास संयुक्त नाम है। प्रशाासन को सही करना चाहिए। इस त्रुटि से ग्रामीणों व विद्यार्थियों को परेशानी के साथ आर्थिक व मानसिक नुकसान हो रहा है।
-सुरेश कुमार, ग्रामीण
मैं रूहिया कॉलेज में बीए द्धितीय वर्ष का विद्यार्थी हूं, मेरे मूल निवास प्रमाण पत्र में गांव नाम मौजास, मौजावास है। आधार कार्ड में मोजास, ग्राम पंचायत से जारी चरित्र प्रमाण व अविवाहित प्रमाण पत्र में सरपंच के हस्ताक्षर स्टॉप में मोजावास लिखा है।
-रजत कुमार, विद्यार्थी
शाला दर्पण के रिकॉर्ड पर गांव के राउमावि का नाम मौजास है। जबकि पीईईओ केन्द्र की सूची में राउमावि मोजावास है। यह स्कूल पीईईओ सेंटर भी है।
-सुनिल भूकल, प्रधानाचार्य, राउमावि