
मनीष मिश्रा.
झुंझुनूं. यहां मां बनने का सुखद एहसास दर्दभरा है। जिगर के टुकड़े को जन्म देने के दौरान जननी का दम टूट रहा है। हकीकत यह है कि पिछले तीन वर्ष में 65 महिलाओं की प्रसव के दौरान मौत हो गई। चिकित्सक इसका मुख्य कारण संक्रमण, अधिक रक्त स्त्राव और एनिमियां मान रहे हैं, लेकिन महिला शिक्षा और बेटी बचाओ अभियान में अग्रणी रहे झुंझुनूं जिले में यह स्थिति चितांजनक है। जननी सुरक्षा के लिए करोड़ों खर्च कर चलाई जा रही सरकारी योजनाओं के दावों में भी दम नजर नहीं आ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रत्येक माह की नौ तारीख को प्रधानमंत्री मातृत्व अभियान के तहत प्रसूताओं की जांच करने के अलावा दवाइयां देने का भी प्रावधान है।
इसी तरह प्रत्येक शुक्रवार को सुरक्षित मातृत्व दिवस भी मनाया जाता है। जिसमें प्रसूताओं की जांच के अलावा जागरूक भी किया जाता है। अंतिम गुरुवार को प्रसूति नियोजन दिवस भी मनाया जाता है। सभी कार्यक्रमों में विभाग की ओर से हर माह मोटा बजट खर्च किया जाता है। प्रसूताओं को आयरन व कैल्शियम की गोली भी दी जाती है। लेकिन इसके बावजूद भी ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसूताओं को इनका लाभ नहीं मिल पाता है।
हर वर्ष 22 प्रसुताओं की मौत
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले तीन सालों में 65 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। यानि हर साल करीब 22 प्रसूताएं काल का ग्रास बन रही है।
मौत की सही सूचना पर मुफ्त रिचार्ज
प्रसव के दौरान होने वाली मौतों का सही कारण पता लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर प्रोत्साहन के तौर पर दो सौ रुपए का मुफ्त मोबाइल रिचार्ज की योजना शुरू की है। योजना का उद्देश्य प्रसूता की मौत के सम्भावित कारणों की जानकारी का पता लगाकर प्रभावी कार्ययोजना तैयार करना है। एसआरए सर्वे के अनुसार प्रदेश में हर साल अनुमानित चार हजार महिलाओं की मौत प्रसव के दौरान होती है। इसके बावजूद विभाग को ऐसी महिलाओं की जानकारी नहीं मिल पाती है। सूचना नहीं मिलने के कारण प्रभावी कार्ययोजनाएं बनाने में परेशानी होती है। घर या रास्ते में मातृ मृत्यु की सही जानकारी 24 घंटे के अन्दर टोल फ्री 104 या ई मित्र पर दी जा सकती है।
मौत के कारण
- अत्यधिक रक्त स्त्राव
- संक्रमण
- एनिमिया
- सही समय पर साधन नहीं मिलना
- इलाज में देरी
- उच्च रक्तचाप
- दौरे आना
आंकड़ों की जबानी
वर्ष मौत
2018 16
2017 26
2016 23
इनका कहना है..
मातृ मृत्यु रोकने के लिए विभाग काफी प्रयास कर रहा है। इसमें काफी सफलता भी मिली है। विशेष रूप से अत्यधिक रक्तस्त्राव व संक्रमण प्रसूताओं की मौत का कारण बनता है। इसके लिए विभाग की टीमें घरों में जाकर प्रसव के दौरान रखी जाने वाली सावधानियों के बारे में महिला व उनके परिजनों को जागरूक कर रही है।
डॉ.दयानंद, आरसीएचओ झुंझुनूं।