भुकाना गांव में प्लांट लगाने वाले सुरेश मील ने बताया कि उसके खेत में पिछले कई साल से फसल का उत्पादन नहीं हो रहा था। पानी पाताल में जा चुका, आवारा पशु फसल को चट कर जाते हैं। उन्होंने बैंक से लोन लेकर एक मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता का प्लांट लगाया है। इसमें उत्पादन इसी माह से शुरू हो जाएगा।
राजस्थान के बाड़मेर, जैसलमेर व बीकानेर के बाद अब शेखावाटी के खेतों में भी फसलों की जगह सौलर प्लेट नजर आने लगी हैं। किसान पहले फसलों के लिए सरकार के बिजली मांगते थे, अब उल्टा होने लगा है। किसान खेतों में बिजली पैदार कर सरकार को बेच रहे हैं। यह संभव हुआ है राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम की कुसुम योजना के कम्पोनेंट ए से। झुंझुनूं जिले में अब तक पांच ऐसे प्लांट बन गए हैं। अधिकतर से बिजली का उत्पादन भी हो रहा है। योजना के तहत किसान अपने खेत में आधा मेगावाट से दो मेगावाट तक के प्लांट लगा सकते हैं।
पीपल का बास में आधा मेगावाट का प्लांट लग रहा है। इसके अलाव मंड्रेला, सूरजगढ़ सहित जिले में अनेक जगह प्लांट लग रहे हैं। इसके अलावा आधा दर्जन से ज्यादा ने योजना के तहत आवेदन कर रखा है।
भुकाना गांव में प्लांट लगाने वाले सुरेश मील ने बताया कि उसके खेत में पिछले कई साल से फसल का उत्पादन नहीं हो रहा था। पानी पाताल में जा चुका, आवारा पशु फसल को चट कर जाते हैं। उन्होंने बैंक से लोन लेकर एक मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता का प्लांट लगाया है। इसमें उत्पादन इसी माह से शुरू हो जाएगा।
एक मेगावाट क्षमता
लागत: करीब पांच करोड़
जमीन चाहिए: लगभग दो हैक्टेयर
औसत उत्पादन: 6000 यूनिट प्रतिदिन
सरकार खरीदती है: तीन रुपए 14 पैसे प्रति यूनिट की दर से
हर दिन की आय: औसत 18840 रुपए
हर माह आय : औसत पांच लाख 65 हजार 200
अन्य खर्चा-हर माह चौकीदार, मैंटेेनेंस, इंजीनियर व अन्य।
(किसानों के अनुसार, इसमें मौसम के अनुसार व कम्पनी की प्लेट के उत्पादन के अनुसार बदलाव संभव)
योजना के प्रति किसानों में जोरदार उत्साह है। इसी साल लगभग साठ नए प्रोजेक्ट लगने की प्रक्रिया चल रही है। किसान खेतों में सौलर प्लांट लगवा रहे हैं।
महेश टीबड़ा, एसई, बिजली निगम झुंझुनूं