झुंझुनू

झुंझुनूं की 19 इन पंचायतों में उपचार के अभाव में दम तोड़ते बेजुबान

झुंझुनूं. सरकार भले ही पशु चिकित्सा के नाम पर करोड़ों का बजट खर्च करने के दावे कर रही हो, लेकिन यहां बेजुबान पशु उपचार के अभाव में हर दिन दम तोड़ रहे हैं। वजह है कि प्रदेश की 1400 से अधिक ग्राम पंचायतों में पशु चिकित्सा सुविधा नहीं है। झुंझुनूं जिले की भी 19 ग्राम पंचायतों के हालात यह ही है।
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jhunjhunu Veterinary department news
झुंझुनूं की 19 इन पंचायतों में उपचार के अभाव में दम तोड़ते बेजुबान

झुंझुनूं. सरकार भले ही पशु चिकित्सा के नाम पर करोड़ों का बजट खर्च करने के दावे कर रही हो, लेकिन यहां बेजुबान पशु उपचार के अभाव में हर दिन दम तोड़ रहे हैं। वजह है कि प्रदेश की 1400 से अधिक ग्राम पंचायतों में पशु चिकित्सा सुविधा नहीं है। झुंझुनूं जिले की भी 19 ग्राम पंचायतों के हालात यह ही है। ऐसे में पशुपालन पर निर्भर रहने वाले परिवारों की स्थिति ज्यादा खराब है।


पिलानी क्षेत्र की स्थिति कमजोर
जिले की 19 ग्राम पंचायतों में पशुओं के इलाज के लिए किसी प्रकार की सुविधा उपलब्ध नहीं है। जिले में पिलानी विधानसभा ऐसी है, जहां पर संस्था विहिन (किसी तरह की विभागीय इकाई क्रियाशील नहीं होना) ग्राम पंचायतों की संख्या सर्वाधिक है।


आजीविका है पशुपालन
जिले में अधिकांश किसानों की आजीविका का साधन पशुपालन हैं। जनप्रतिनिधियों की ओर से बेहतर सुविधाओं के दावे किए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद ग्राम पंचायतों में बेजुबानों के लिए इलाज के लिए कोई व्यवस्था नहीं होना पशुपालकों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। पशुओं के बीमार होने पर हायर सेन्टर पर लाया जाता है, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिलने से कई पशु रास्ते में दम तोड़ देते हैं।


झुंझुनूं में सुविधा से वंचित क्षेत्र
मंडावा- भूदा का बास, हरीपुरा, चूड़ी अजीतगढ़
पिलानी- भगीना, घंडावा, घूमनसर, खेड़ला, स्वामी सेही, नारी, नूनिया गोठड़ा, ओजटू, मोरवा, डालमियो की ढाणी
खेतड़ी- टीबा
सूरजगढ़- डूमोली कलां, गुजरवास, सांतोर व लाखू
नवलगढ़- ढाका की ढाणी


प्रदेश में कितने संस्थान
पशु चिकित्सा संस्थान- 7897
बहुउद्देशीय- 35
प्रथम श्रेणी- 785
पशु चिकित्सालय- 1710
डिस्पेंसरी- 198
पशु चिकित्सा उपकेन्द्र- 5067
मोबाइल वेटेनरी यूनिट- 102


जिले की स्थिति
पॉलीक्लिनिक- एक
प्रथम श्रेणी चिकित्सालय- 35
पशु चिकित्सालय- 102
उप स्वास्थ्य केन्द्र- 174

इनका कहना है...
ऐसी ग्राम पंचायतों की संख्या अब बहुत कम रह गई है। साल के अंत तक शेष रहे ग्राम पंचायतों में इलाज की सुविधाएं शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
जगदीश बरबड़, सहायक निदेशक पशुपालन विभाग झुंझुनूं

Published on:
07 Jul 2018 11:51 am