
झुंझुनूं. jhunjhunu news : मिड-डे-मील के तहत सरकारी स्कूलों में मिलने वाले दूध व भोजन परोसने से पहले अभिभावक व एसडीएमसी सदस्य उसकी जांच करेंगे। भोजन व दूध की गुणवत्ता व स्वाद सही होने के बाद ही परोसा जाएगा। यह कार्य संस्था प्रधानों को नियमित रूप से करना होगा। संस्था प्रधानों को उक्त प्रक्रिया का रजिस्टर भी संधारण करना होगा कि कौनसे दिन किस अभिभावक ने विद्यालय में भोजन का स्वाद चखा और गुणवत्ता देखी। यह प्रक्रिया नहीं अपनाने वाले संस्था प्रधानों के खिलाफ नोटिस जारी करने की कार्रवाई की जाएगी।
छह दिन दूध और एक दिन मिलेंगे फल
शिक्षा अधिकारियों की मानें तो मिड-डे-मील में भोजन के अलावा छह दिन विद्यार्थियों को पौष्टिक दूध दिया जाएगा। वहीं, छह दिन के दौरान एक दिन फल दिए जाने जरूरी होंगे। एक जुलाई ने नई व्यवस्था का फायदा जिले के एक लाख से अधिक विद्यार्थियों को मिल सकेगा। जिले के 1574 राजकीय स्कूलों के कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों को अभिभावक व एसडीएमसी के सदस्यों के दूध व भोजन की गुणवत्ता की जांच और चखने के बाद ही मिलेगा।
भोजन में इतनी कैलोरी होना जरूरी
-कक्षा एक से पांचवीं तक के प्रत्येक विद्यार्थी को दिए जाने वाले भोजन के लिए 450 कैलोरी और 12वीं प्रोटीन
-कक्षा छह से आठवीं तक के प्रत्येक विद्यार्थी को सात कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन
इनका कहना है...
आयुक्त मिड-डे-मील की ओर से आदेश जारी किया गया है। एक जुलाई से विद्यार्थियों को मिलने वाले भोजन व दूध की जांच और उसका स्वाद रोजाना एक अभिभावक व एसडीएमसी सदस्य के करने के बाद ही विद्यार्थियों को परोसना होगा। इसका रजिस्टर संधारण करना होगा।
मनोजकुमार ढाका, जिला शिक्षा अधिकारी (प्रा.) झुंझुनूं