जांच में सामने आया कि जहां बुलबुले उठे वहां पिछले सात साल में 10 से 11 मीटर भूजल स्तर कम हुआ है। रिपोर्ट में बताया कि बुलबुलों में कोई खतरनाक गैस नहीं मिली है। इसलिए डरने जैसी कोई बात नहीं है। रिपोर्ट में लिखा है इस घटना का शायद ही कोई भू वैज्ञानिक संबंध हो। मिट्टी का पीएच 7.5 मिला है। वहां पास ही पाइप लाइन गुजर रही है। जहां बुलबुला उठा वहां से लगभग चार मीटर की दूरी पर जमीन से दो मीटर नीचे 300 एमएम व्यास वाली पाइप लाइन गुजर रही है।
राजेश शर्मा
राजस्थान के झुंझुनूं शहर के मंडावा मोड पर सड़क किनारे मिट्टी के बुलबुले उठने के कई कारण सामने आए हैं। इनमें एक बड़ा कारण जिस जगह मिट्टी के बुलबुले उठे थे, उससे कुछ दूरी से गुजर रही पाइप लाइन में रिसाव को माना गया है। वहां का भूजल स्तर भी पिछले सात साल में 10 से 11 मीटर कम हुआ है। भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण विभाग की टीम ने अपनी 15 पेज की जांच रिपोर्ट में यह बात कही है।दरअसल झुंझुनूं में सात से नौ मई तक लगातार मिट्टी के बुलबुले उठे तो लोग सहम से गए थे। इसे बीकानेर जैसी घटना को जोड़कर देख रहे थे। इसके वीडियो भी तेजी से वायरल हुए थे। इस पर मामले की जांच के लिए टीम 11 मई 2024 को झुंझुनूं आई थी। अब निदेशक एम. श्याम कुमार सिंह, निदेशक पवन कुमार व रसायनज्ञ मोहित ने रिपोर्ट प्रशासन व अपर महानिदेशक एवं विभागाध्यक्ष भारतीय भू वैज्ञानिक सर्वेक्षण पश्चिमी क्षेत्र जयपुर को सौंप दी है।
जांच में सामने आया कि जहां बुलबुले उठे वहां पिछले सात साल में 10 से 11 मीटर भूजल स्तर कम हुआ है। रिपोर्ट में बताया कि बुलबुलों में कोई खतरनाक गैस नहीं मिली है। इसलिए डरने जैसी कोई बात नहीं है। रिपोर्ट में लिखा है इस घटना का शायद ही कोई भू वैज्ञानिक संबंध हो। मिट्टी का पीएच 7.5 मिला है। वहां पास ही पाइप लाइन गुजर रही है। जहां बुलबुला उठा वहां से लगभग चार मीटर की दूरी पर जमीन से दो मीटर नीचे 300 एमएम व्यास वाली पाइप लाइन गुजर रही है। पाइप में छोटी दरार व छिद्र होने से पानी का रिसाव होता है। जल आपूर्ति से ठीक पहले पानी के साथ हवा का रिसाव हो सकता है। पानी सतह के वाष्पीकरण के साथ-साथ मोटे एओलियन रेत स्तभ के भीतर अवशोषित हो सकते हैं। इस कारण बुलबुले उठ सकते हैं। उल्लेखनीय है कि यह बुलबुले पानी के नहीं, बल्कि सूखी मिट्टी के थे।
-सैटेलाइट से भौगोलिक स्थिति देखी।
-पिछले सात साल के भूजल के आंकड़े जांचे।
-तीन अलग-अलग गहराई से मिट्टी के तापमान, पीएच व नमी का पता किया।
-बुलबुलों के पास की गैस लेकर इसकी जांच की।
-जमीन के नीचे की परतों का अध्ययन किया।
-आस-पास के लोगों से जानकारी जुटाई।
-दुबारा गैस निकले तो इसे एयरटाइट पाउच में एकत्र करें।
-घटना का समय व अवधि सही तरीके से नोट करें।
-जलआपूर्ति पाइप लाइन की जांच कर इसकी मरमत करवाएं।
-क्षतिग्रस्त फुटपाथ की तत्काल मरमत करवाई जाए।
बीकानेर के सहजरासर गांव में 15 अप्रेल 2024 को अचानक जमीन धंस गई थी। इससे 150 से 200 फीट लबा-चौड़ा तथा तकरीबन 90-100 फीट गहरा गड्ढा हो गया था। इसके बाद जयपुर से आई भारतीय भू-सर्वेक्षण विभाग की तीन सदस्यीय टीम ने जांच के बाद जल के अत्यधिक दोहन को कारण माना था। जांच रिपोर्ट में बताया है कि बरसात की कमी से भूजल रिचार्ज नहीं हुआ। इससे जमीन खोखली हो गई और मिट्टी नीचे चली गई।