
शहीद श्योराम गुर्जर की वीरांगना को सम्मानित करते हुए (फोटो- पत्रिका)
Shahadat Ko Salam खेतड़ी (झुंझुनूं): शहादत और सम्मान की बात आते ही झुंझुनूं का नाम सबसे आगे लिया जाता है। हर गांव किसी न किसी बलिदान की कहानी कहता है। वीरांगनाएं गर्व के साथ कहती हैं, मेरे पति ने देश के लिए प्राण दिए हैं।
वहीं, पिता की शहादत के किस्से सुनकर बच्चों का सीना गर्व से भर जाता है और वे भी पापा की तरह सेना में जाने का सपना संजोते हैं। पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड कामरान गाजी को ढेर करने वाले शहीद हवलदार श्योराम गुर्जर का परिवार भी उसी परंपरा का हिस्सा है, लेकिन शहादत के छह साल बाद भी वीरांगना सुनीता देवी को उनका हक नहीं मिल पाया, वह आज भी अनुकंपा नियुक्ति की राह देख रही हैं।
खेतड़ी क्षेत्र के टीबा गांव निवासी शहीद श्योराम गुर्जर की वीरांगना सुनीता देवी (एमए, बीएड) पिछले छह वर्षों से अनुकंपा नियुक्ति के लिए भटक रही हैं। हालांकि, उन्हें लिपिक और पटवारी जैसे पदों पर नौकरी मिल रही थी। लेकिन उनका सपना सिर्फ शिक्षक बनने का है।
ऐसे में फाइल नियमों का हवाला देकर वर्षों तक अटकी रही। वीरांगना ने बताया कि एमए बीएड करने के बाद रीट उत्तीर्ण कर ली थी, लेकिन सरकार ने तब रीट रद्द कर दी थी। आठ महीने पहले फिर से रीट उत्तीर्ण कर ली। अब दस्तावेज सत्यापन के लिए कार्मिक विभाग जयपुर भेजे गए हैं, लेकिन अंतिम निर्णय नहीं हुआ।
14 फरवरी 2019 को पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमले में 45 जवान शहीद हो गए थे। आतंकियों की तलाश में सेना ने ऑपरेशन रक्षक चलाया। 18 फरवरी 2019 को सुरक्षा बलों को पुलवामा के पास पिंगलाना गांव में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली।
इस मुठभेड़ में टीबा गांव निवासी हवलदार श्योराम गुर्जर ने पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड कामरान गाजी सहित तीन आतंकवादियों को मार गिराया। लेकिन इसी ऑपरेशन में वे स्वयं वीरगति को प्राप्त हो गए।
देश की रक्षा में अद्वितीय साहस दिखाने वाले शहीद श्योराम गुर्जर को 15 जनवरी 2020 को आर्मी डे के अवसर पर तत्कालीन थलसेना अध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने सेना मेडल (मरणोपरांत) से सम्मानित किया। यह सम्मान वीरांगना सुनीता देवी ने ग्रहण किया।
शहीद श्योराम गुर्जर 7 जुलाई 2000 को भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। उनके दो पुत्र खुशांक और दुर्जांश हैं। बड़ा पुत्र खुशांक पिता की शहादत के समय 4 वर्ष का था, जबकि छोटा पुत्र दुर्जांश उस समय वीरांगना के पेट में था। उसका जन्म श्योराम की शहादत के 18 दिन बाद 7 मार्च 2019 को हुआ। शहीद के छोटे भाई रूपचंद सेना से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने भाई के शहीद होने के बाद परिवार को देखते हुए सेना से सेवानिवृत्ति ले ली।
सरकार ने टीबा गांव के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का नामकरण शहीद श्योराम गुर्जर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय किया है। वीरांगना सुनीता का कहना है कि शहीद के अंतिम संस्कार के समय नेताओं ने गांव में सड़क का नामकरण और प्रवेश द्वार बनाने की घोषणा की थी, लेकिन ये कागजों से बाहर नहीं आ सकीं।
राजस्थान पत्रिका के शहादत को सलाम मुहिम के तहत शनिवार को वीरांगना सुनीता का सम्मान किया गया। इस मौके पर शहीद के छोटे भाई रूपचंद सिराधना, नारायण सिंह अवाना, मालाराम अवाना, पप्पूराम अवाना, चुन्नीलाल अवाना, महावीर अवाना, भोमाराम अवाना, बृजलाल, जयपाल, द्वारका प्रसाद शर्मा, अनीता देवी और मंजू देवी मौजूद रहे।
Updated on:
12 Jan 2026 10:14 am
Published on:
11 Jan 2026 05:15 am

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