
गुढ़ागौड़जी: ककराना गांव के लिए सोमवार का दिन बेहद दुखद रहा। मुंबई से पूर्णमल मेहरा, उनकी पत्नी ओमा और दोनों बच्चों की पार्थिव देह जब गांव पहुंची तो माहौल गमगीन हो गया। चारों को एक साथ खोने के दुख में ग्रामीणों की आंखें नम थीं। गांव में हर कोई इस घटना से सदमे में था और इसे ककराना के लिए कभी न भूल पाने वाला दिन बताया जा रहा था।
चारों पार्थिव देह को पहले गुढ़ागौड़जी थाने लाया गया। यहां से ग्रामीण तिरंगा यात्रा के रूप में उन्हें ककराना लेकर पहुंचे। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। जयपुर से आई सेना की टुकड़ी ने नेवी में सेवाएं दे चुके पूर्णमल मेहरा को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके बाद पूरे सम्मान के साथ पूर्णमल, ओमा और उनके दोनों बच्चों का अंतिम संस्कार किया गया।
गौरतलब है कि पूर्णमल मेहरा, उनकी पत्नी और दोनों बच्चों के शव मुंबई स्थित मकान में मिले थे। घटना की जानकारी मिलने के बाद से ही ककराना में परिवार को लेकर चिंता और शोक का माहौल था। सोमवार को पार्थिव देह गांव पहुंचने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने उन्हें अंतिम विदाई दी। बड़ी संख्या में लोग अंतिम संस्कार में मौजूद रहे।
परिजनों ने बताया कि पूर्णमल जोधपुर से नेवी में भर्ती हुए थे। करीब नौ माह पहले वह परिवार सहित ककराना गांव आया था। गांव आने के दौरान उसने परिजनों और ग्रामीणों से मुलाकात की थी। किसी को भी अंदेशा नहीं था कि कुछ समय बाद परिवार पर ऐसी दुखद घड़ी आ जाएगी। घटना की सूचना मिलने के बाद से ही ककराना में शोक का माहौल बना हुआ है और परिवार को ढांढस बंधाने के लिए ग्रामीण लगातार पहुंच रहे हैं।
परिजनों के अनुसार करीब दो माह पहले पूर्णमल के घर बेटी का जन्म हुआ था। उस समय उसकी मां मुंबई गई थी। परिवार में बेटी के जन्म की खुशी के बाद अब अचानक चार सदस्यों की मौत से पूरा परिवार सदमे में है। परिजनों की करीब छह दिन पहले पूर्णमल से फोन पर बातचीत हुई थी। इसके बाद जब लगातार तीन दिन तक फोन करने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला तो परिजनों की चिंता बढ़ गई।