बूंदी

हिन्दुस्तान के इस ‘दीवाने’ कासिम ने सिर्फ इसलिए ठुकरा दी ओमान की नागरिकता

झुंझुनूं के इस्लामपुर के 83 वर्षीय कासिम कायमखानी उर्फ दीवाना। इनके द्वारा बनाए चित्रों और सजीव मूर्तियों ने सात समंदर के लोगों को भी इनका 'दीवाना' बनाया है।
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Updated: 9 May 2017, 12:31 PM IST
Artist kasim of jhunjhunu
Artist kasim of jhunjhunu

हर इंसान में कोई ना कोई ऐसी कला होती है, जो उसे बुलंदी तक पहुंचा सकती है। इस बात का उदाहरण हैं झुंझुनूं के इस्लामपुर के 83 वर्षीय कासिम कायमखानी उर्फ दीवाना। इनके द्वारा बनाए चित्रों और सजीव मूर्तियों ने सात समंदर के लोगों को भी इनका 'दीवाना' बनाया है।


ये पढ़े-लिखे नहीं, मगर कला की समझ इन्हें अच्छे से है। कई साल पहले कासिम काम की तलाश में मुम्बई गए थे। वहां दरिया किनारे एक कलाकार को मूर्तियां बनाते देख इतने प्रभावित हुए कि यही काम करने लगे। दीवाना ने मिट्टी, कांच, फाइबर, प्लास्टर ऑफ पेरिस, मार्बल व आरसीसी की ऐसी कलाकृतियां बनाई हैं।




इन्होंने मंदिर, मस्जिद, दरगाह व होटल आदि में देवताओं या अन्य आकृतियों के माध्यम से अपनी कला का जादू दिखाया है। दीवाना ने सऊदी अरब, ओमान व नेपालके लोगों को अपनी कला दिखा चुके हैं। ओमान के बादशाह ने इनकी चित्रकारी से प्रभावित होकर वहां की नागरिकता का प्रस्ताव भी दीवाना के सामने रखा था, मगर इन्होंने प्रस्ताव यह कहकर ठुकरा दिया कि वह अपनी मातृभूमि को किसी हाल में नहीं छोड़ सकता।


पूर्व प्रधानमंत्री ने दिया 'दीवाना' नाम


कासिम ने बताया कि मुम्बई में एक बड़े मंदिर पर चित्रकारी की थी, जिसकी प्रशंसा सुनकर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उसे निहारने वहां पहुंची थी। चित्रकारी से प्रभावित होकर गांधी ने कलाकार को बुलाया तो कासिम उनके सामने सिर नीचे किए खड़ा रहा। तब इंदिरा गांधी ने कहा कि 'अरे! दीवाना आप कहां खो गए हो।' तब कासिम को हर कोई दीवाना कहने लगा।



इनको है नन्हीं कूंची पर नाज

शंकराचार्य स्वरूपानंद के जोशी मठ का निर्माण इन्होंने ने ही किया था। झुंझुनूं, बगड़ व नरहड़ की दरगाहों के बुलंद दरवाजों, पंचदेव मंदिर,गायत्री मंदिर, खेमी शक्ति, राणी शक्ति मंदिरों के सिंहद्वारों पर बेहतरीन ढंग से उकेरी गई मूर्तियां भी दीवाना की उस नन्हीं कूंची पर नाज करती हैं। मध्यप्रदेश की परमहंस गंगा के निर्माण पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी व झुंझुनूं में होने वाले शेखावाटी हस्तशिल्प मेले में भी दीवाना को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जा चुका है।
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