जिले में रोगियों के बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। सबसे ज्यादा संक्रमित विदेश में जाकर नौकरी-पैसा करने वाले हैं। दूसरा नंबर ट्रक समेत अन्य बड़े वाहनों के चालक-परिचालक हैं तथा तीसरा कारण कइयों से शारीरिक संबंध बनाना है।
एचआइवी संक्रमण की वजह से जिले में एड्स रोगियों की संख्या बढ़ रही है। जागरूकता की कमी और समय पर इलाज नहीं लेने की वजह से एचआइवी संक्रमित दम तोड़ रहे हैं। बीते एक दशक के दौरान झुंझुनूं जिले में बढ़ी एड्स रोगियों की संख्या चिंताजनक है। बीते दस साल के दौरान जिले में 2080 रोगी सामने आ चुके हैं और इनमें 422 की मौत हो चुकी है। जिले में कई ऐसे भी मरीज हैं, जिन्होंने जांच नहीं कराई और उनकी मौत हो गई।
एचआइवी संक्रमित मरीजों के बढ़ते आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि साल दर साल कितने रोगी बढ़ रहे हैं। जानकारों की मानें तो बीते एक साल के दौरान जिले में 59 नए एचआइवी संक्रमित रजिस्टर्ड हुए हैं। बीडीके अस्पताल के एआरटी सेंटर में वर्तमान में 1264 एक्टिव मरीज हैं, जो यहां से नियमित रूप से दवा ले रहे हैं। जबकि पहले से दवा ले रहे 11 मरीजों की मौत हो चुकी है। जबकि अस्पताल के अलावा भी इलाज ले रहे हैं। जिले में हर महीने औसतन एक मरीज की इस बीमारी से मौत हो रही है। एआरटी सेंटर से दवा लेने वालों में अनेक ऐसे मरीज हैं जो बीमारी को छुपाते हैं। बीमारी को छुपाने के सबसे ज्यादा मामले पति और पत्नी के बीच के हैं। जांच के दौरान अगर पत्नी एचआइवी पॉजिटिव निकल आती है तो वह डॉक्टरों व सेंटर में कार्यरत कर्मचारियों से मना करती है कि उनके पति को यह नहीं बताया जाए और अगर पति एचआइवी पॉजिटिव निकल जाता है तो वह पत्नी को नहीं बताने के लिए डॉक्टर व नर्सिंगकर्मियों को मना करता है। एआरटी सेंटर में इलाज ले रहे आधा दर्जन ऐसे मामले हैं। इसके अलावा अनेक ऐसे लोग भी हैं जो अपने परिवार में किसी को नहीं बताते हैं। हालांकि अस्पताल प्रबंधन एचआइवी संक्रमित की पहचान सार्वजनिक नहीं करता है। लेकिन पति-पत्नी जैसे रिश्ते में बतौर सावधानी एक-दूसरे को जानकारी होना जरूरी होता है। पति-पत्नी के अलावा अगर कोई संक्रमित है तो उसके परिवार में मां-बाप या किसी जिम्मेदार को उसके इलाज में सहायता के लिए पूछा जाता है। ये मरीज की सहमति पर निर्भर होता है।
जिले में रोगियों के बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। सबसे ज्यादा संक्रमित विदेश में जाकर नौकरी-पैसा करने वाले हैं। दूसरा नंबर ट्रक समेत अन्य बड़े वाहनों के चालक-परिचालक हैं तथा तीसरा कारण कइयों से शारीरिक संबंध बनाना है।
एचआइवी संक्रमित को नियमित रूप से इलाज और डाइट का लेना जरूरी है। अगर कोई एचआइवी संक्रमित नियमित दवा लेकर इलाज और अच्छी डाइट ले रहा है तो लंबा जीवन जी सकता है। चिकित्सकों से समय-समय पर परामर्श लेते रहे। पॉजिटिव आने के बाद यौन संबंध स्थापित करने से पहले पूरी सावधानी बरतें। बहुत से ऐसे पॉजिटिव हैं जो नियमित इलाज और बेहतर डाइट लेने से लंबा जीवन जी रहे हैं। जिले में एक साल में 59 नए रोगियों का मिला चिंताजनक है।