झुंझुनूं. नूआं गांव की ईद बानों की ऑपरेशन के दौरान संक्रमित दाईं की जगह बाईं किडनी निकालने के मामले में ईद बानों व उसके पति शब्बीर ने इंसाफ की मांग की है। नुआं में अपने घर पर पलंग पर लेटी महिला मरीज बानो से जब मामले के बारे में पूछा गया तो वह इतना ही […]
झुंझुनूं. नूआं गांव की ईद बानों की ऑपरेशन के दौरान संक्रमित दाईं की जगह बाईं किडनी निकालने के मामले में ईद बानों व उसके पति शब्बीर ने इंसाफ की मांग की है। नुआं में अपने घर पर पलंग पर लेटी महिला मरीज बानो से जब मामले के बारे में पूछा गया तो वह इतना ही बोल पाई कि धनखड़ अस्पताल में ऑपरेशन कराया था। वहां दाएं के स्थान पर बाएं गुर्दा निकालकर मेरी और मेरे बच्चों की जिंदगी खराब कर दी। मुझे इंसाफ मिलना चाहिए। मेरे बच्चों की मदद होनी चाहिए। उनके एक बेटा व एक बेटी है जो अभी छोटे हैं। बानो के पति शब्बीर ने कहा कि हमारी तो जिदंगी खराब कर दी। बानो के पेट में दर्द होने पर 12 मई को धनखड़ अस्पताल गए थे। वहां डॉक्टर संजय धनखड़ ने कहा कि गुर्दे में पथरी और मवाद है। किडनी निकाल देते हैं। इंसान एक गुर्दे पर भी जिंदा रह सकता है। इसके बाद उन्होने ऑपरेशन किया। तबीयत खराब होने पर जयपुर एसएमएस गए तो पता चला कि खराब की जगह सही किडनी निकाली गई। डॉक्टर ने कहा कि डायलिसिस कराते रहना पड़ेगा।
महिला मरीज की एक किडनी खराब है, जिसे निकाला जाना था। लेकिन धनकड़ अस्पताल के डॉक्टरों ने सही किडनी को निकाल लिया। इसके बावजूद मरीज को 25 मई को उसके आग्रह पर बिना सरकार को जानकारी दिए ही घर भेज दिया गया। इस सवाल पर मंत्री गजेंद्रसिंह ने कहा कि उनके पास जानकारी ही नहीं थी तो वे क्या कर सकते थे। पूरे मामले में विभाग की अतिरिक्त मुय सचिव शुभ्रा सिंह ने कहा है कि डॉक्टरों को इस तरह के प्रकरणों की जानकारी तत्काल देने के निर्देश दिए हैं। मेडिकल कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ.दीपक माहेश्वरी ने कहा कि मामला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का है, प्रकरण की जानकारी उनके पास ही थी। उन्हें महिला के डिस्चार्ज होने के बाद जानकारी मिली। वहीं, सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के अधीक्षक डॉ.विनय मल्होत्रा का फोन स्विच ऑफ आता रहा।
अंग प्रत्यारोपण के लिए फर्जी एनओसी जारी करने की गूंज के बीच झुंझुनूं के धनकड़ अस्पताल में खराब किडनी की बजाय सही किडनी निकाले जाने के मामले को सवाईमानसिंह मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के चिकित्सकों ने भी रफा-दफा करने की कोशिश की। चौंकाने वाली बात यह है कि एसएमएस के डॉक्टरों को 21 मई को ही मरीज की गलत किडनी निकाले जाने की जानकारी लग चुकी थी। लेकिन इसके बावजूद मेडिकल कॉलेज प्राचार्य, चिकित्सा मंत्री और विभाग के आला अधिकारियों तक इसकी भनक नहीं लगने दी गई। राजस्थान पत्रिका ने चिकित्सा मंत्री से इस प्रकरण पर सवाल किया तो उनका कहना था कि एसएमएस मेडिकल कॉलेज के किसी भी डॉक्टर ने सात दिन तक उन्हें इस प्रकरण की जानकारी नहीं दी। जबकि राज्य में पिछले करीब दो महीने से किडनी प्रत्यारोपण में फर्जी एनओसी का प्रकरण चल रहा है। उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है, इसकी पूरी जांच करवाएंगे। नूआं निवासी 54 वर्षीय मरीज बानो को परिजन जयपुर एसएमएस से लेकर नुआं आ गए। जहां पर मंगलवार को तबीयत खराब होने पर मरीज को परिजन पीबीएम अस्पताल बीकानेर लेकर चले गए।