गांव के जो युवा शराब के अवैध कारोबार में रोजगार तलाशने में लगे थे, वह आज पढ़ लिख कर कुछ बनना चाह रहे हैं। यह सब संभव हुआ है रिटायर्ड फौजी दिनेश सिंह शेखावत की बदौलत, जो दिनभर गांव के बच्चों के बीच रह कर उन्हें तैयारी करवाते हैं।
यह कहानी है झुंझुनूं जिले के हरियाणा सीमा से सटे गांव बेरी की। यहां के लाडले दिनेश सिंह ने फौज से रिटायरमेंट के बाद गांव के बच्चों में छिपे हुनर को तलाशने का काम किया। उनकी प्रतिभा और क्षमता के अनुसार ही उन्हें मार्गदर्शन देना शुरू किया। यहां तक कि वह सुबह से शाम तक बच्चों के साथ रहकर खुद के खर्चे पर उन्हें खेल प्रतियोगिताओं की तैयारी करवाते हैं।
दिनेश सिंह से मार्गदशर्न या प्रशिक्षण लेकर आज बेरी तथा आसपास के गांवों के डेढ़ सौ से अधिक युवा सरकारी नौकरी में चयनित हो चुके हैं। इनमें 80 युवा तो थलसेना, आइटीबीपी, एयरफोर्स, दिल्ली पुलिस में सेवा दे रहे हैं। इसके अलावा शिक्षक एवं बैंक सहित अन्य सर्विस में हैं। कई युवा राष्ट्रीय तथा प्रदेश स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेकर मेडल जीत चुके हैं।
दिनेश सिंह बताते हैं कि उनके गांव बेरी में रोजगार के अभाव में लोग भट्टियों से अवैध कच्ची शराब तैयार करके दूर-दूर तक सप्लाई करने का कार्य करते थे। उन्हें लगा कि नई पीढ़ी में परिवर्तन नहीं किया गया तो वह भी इसमें ही रोजगार की तलाश करेंगे। इसलिए जब वह आर्मी से सेवानिवृत्त होकर गांव आए तो उन्होंने बच्चों की प्रतिभा के अनुसार उन्हें निशुल्क मार्गदर्शन व ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया। इसी का परिणाम है कि आज पूर्व फौजी दिनेश सिंह को लोग गुरुजी के नाम से संबोधित करते हैं।