होली के दिन झुंझुनूं जिले के बलरिया गांव में खुद की कार को आग लगाकर सेना के एक जवान ने खुद के जिंदा जलकर मौत हो जाने का षड़यंत्र रचा। लेकिन रविवार को फोजी विकास भास्कर पुलिस को जिंदा मिला। पुलिस के पकड़ में आने के बाद सोमवार को अपराध बोध में आकर उसने जहर खाकर अपनी जान दे दी। अब कार में जिंदा कौन जला था, पुलिस इसकी जांच कर रही है।
होली के दिन झुंझुनूं जिले के मुकुन्दगढ़ के बलरिया गांव में खुद की कार को आग लगाकर सेना के एक जवान ने खुद के जिंदा जलकर मौत हो जाने का षड़यंत्र रचा। घरवालों ने भी उसे ही मृत समझ कर उसका अंतिम संस्कार कर दिया। लेकिन रविवार को फोजी विकास भास्कर पुलिस को जिंदा मिला। पुलिस के पकड़ में आने के बाद सोमवार को अपराध बोध में आकर उसने जहर खाकर अपनी जान दे दी। अब कार में जिंदा कौन जला था, पुलिस इसकी जांच कर रही है।
महेश को जलाया था कार में
कार में जिंदा जलने वाला ग्रामीण महेश माहिच हो सकता है। क्योंकि महेश के परिजन तीन दिन से यह दावा कर रहे हैं कि महेश होली वाले दिन विकास की गाड़ी मैं बैठा था, उसके बाद से वह लापता है।
दरअसल होली की रात मुकुन्दगढ़ के बलरिया गांव के पास अंडरपास की दीवार से टकराकर एक कार में आग लगले और उसमें एक जने के जिंदा जलने की सूचना मिली थी। कार विकास भास्कर थी और मौके पर जले हुए युवक की खोपड़ी का हिस्सा ही मिला था। ऐसे में सबने मान लिया कि विकास जिंदा जल गया। लेकिन कार में जिंदा जला युवक सेना का जवान नहीं, बल्कि कोई और ही था। इसका खुलासा तब हुआ, जब विकास पुलिस को जिंदा मिल गया। पुलिस उसे गंभीर हालात में झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल लेकर आई। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार विकास ने जहर खाया था।
विकास की कार में जिस दिन आग ली, उसी दिन से ही डूंडलोद निवासी महेश मेघवाल भी लापता है। महेश के परिजन का मानना है कि कार में विकास नहीं, बल्कि महेश था। उसे
इसलिए रचा मौत का षड्यंत्र
बताया जा रहा है कि डेढ़ करोड़ की बीमा पॉलिसी के क्लेम उठाने के लिए विकास ने खुद की मौत का षड्यंत्र रचा था। पुलिस सोमवार को मामले का खुलासा करने वाली थी। इस बीच विकास ने जहर खा लिया।