झुंझुनू

जब तेरा और मेरा एक ही रंग है, फिर बताओ भला किसलिए जंग है…

झुंझुनूं. गुलाबी सर्दी के बीच तालियों की गडगड़़ाहट.. तो कभी शेर पर मिलती दाद। कभी श्रंृगार पर झूमते तो कभी हास्य की बौछार में गोते लगाते श्रोता। मौका था संगीत एवं साहित्यक संस्था बज्म-ए-मौसिकी की ओर से शुक्रवार को आयोजित ऑल इंडिया मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का।शहर के थ्री डॉट्स चिल्ड्रेन स्कूल में एक शाम कतील राजस्थानी के नाम से आयोजित मुशायरे व कवि सम्मेलन में श्रोता देर रात तक शायरों व कवियों को सुनते रहे। प्रख्यात शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने जब अपनी रचनाएं सुनानी शुरू की तो श्रोता भी अपने हाथ तालियां बजाने से रोक नहीं पाए।
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When you and I have one color, then tell me what is the war for ...
जब तेरा और मेरा एक ही रंग है, फिर बताओ भला किसलिए जंग है...

जब तेरा और मेरा एक ही रंग है, फिर बताओ भला किसलिए जंग है...
संपत सरल व इमरान प्रतापगढ़ी को सुनने के लिए देर रात तक जमे रहे श्रोता

झुंझुनूं. गुलाबी सर्दी के बीच तालियों की गडगड़़ाहट.. तो कभी शेर पर मिलती दाद। कभी श्रंृगार पर झूमते तो कभी हास्य की बौछार में गोते लगाते श्रोता। मौका था संगीत एवं साहित्यक संस्था बज्म-ए-मौसिकी की ओर से शुक्रवार को आयोजित ऑल इंडिया मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का।
शहर के थ्री डॉट्स चिल्ड्रेन स्कूल में एक शाम कतील राजस्थानी के नाम से आयोजित मुशायरे व कवि सम्मेलन में श्रोता देर रात तक शायरों व कवियों को सुनते रहे। प्रख्यात शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने जब अपनी रचनाएं सुनानी शुरू की तो श्रोता भी अपने हाथ तालियां बजाने से रोक नहीं पाए। उनके हर के शेर में वन मोर व वाह-वाह की दाद मिलती रही। उन्होंने... पूछता है तिलक से वजू चीखकर.., आमने-सामने रूबरू चीखकर.., लड़ के दंगों में जिसको बहाया गया, पूछता है हमारा लहू चीखकर, जब तेरा और मेरा एक ही रंग है, फिर बताओ भला किसलिए जंग है...सुनाई। वहीं उन्होंने राजनीति पर व्यंग्य करते हुए सुनाया कि देशभक्ति कभी न्याय के नाम पर..., देश को बेचा गया कभी चाय के नाम पर..., आदमी आज खुद जानवर हो गया.., जान लेता है वो गाय के नाम पर... रचना सुनाई। वहीं जिया टोंकी, ईशा नाज, नवाजिश खान शामली, रितीका, तबस्सुम अश्क उज्जैन, गुलजार जिगर देवबंदी, तरन्नुम निशात नैनीताल, सागर करौलवी भी ने भी अपनी रचनाएं पेश श्रोताओं की दाद पाई। कार्यक्रम के आयोजक राजस्थान कांग्रेस प्रदेश सेवादल सचिव तथा बज्म-ए-मौसिकी के एमडी चोपदार ने शायरों कवियों व अतिथियों का स्वागत किया।
भूना कोई जाता है भुनाता कोई और है
हास्य-व्यंग्य के कवि संपत सरल ने अपने तीखे व्यंग्य बाणों से सरकार व अच्छे दिनों पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने सर्जिकल स्ट्राकल डे मनाने पर व्यंग्य करते हुए कहा कि सीमा पर भूना कोई जाता है और राजनीति में भूनाता कोई और है। वहीं उन्होंने राजनैतिक हालातों पर भी जमकर कटाक्ष किए।

मैं दिल की जगह दिल्ली की बात करता हूं
मुशायरे में शिकरत करने आए प्रख्यात शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने राजस्थान पत्रिका से विशेष वार्ताकरते हुए कहा कि वे दिल की जगह दिल्ली की बात करते हैं। एक दौर तथा जब खुशहाली थी लोग कवि सम्मेलन व मुशायरों में मनोरंजन तलाशते थे। अब लोग सियासत पर बात करने से कतराते हैं। देश में जो कुछ घट रहा है,उसे अपनी कविता, नज्म के माध्यम से उठाते हैं। उन्होंने कहा कि वे दिल की जगह दिल्ली की बात करते हैं। प्रतापगढ़ी ने वर्ष 2008 में कवि सम्मेलन व मुशायरे की शुरूआत की थी। इस दौरान मुम्बई में हुए एक कार्यक्रम से उन्हें खासी पहचान मिली। उन दिनों सोशल मीडिया लोगो की जिंदगी में आया था। उनकी मदरसे पर लिखी नज्म काफी वायरल हुई। मुशायरे व कवि सम्मेलन व्यवसायिक हो गए हैं। मुशायरे में थोड़ी शायरी बची है। कवि सम्मेलनों में बीच में हास्य के नाम पर फूहड़ता परोसी जाने लगी। अब गीतकारों ने मंचों पर फिर से कविता स्थापित की है।

यहां हर जेठालाल के मन में एक बबीता है...
कवि सम्मेलन में श्रोतओं को हास्य की गंगा में डूबकी लगवाते हुए नवलगढ़ के हास्य कवि हरीश हिंदुस्तानी ने अपनी हास्य कविताओं से श्रोताओं को गुदगुदाया। उन्होंने धारा 477 हटाने पर व्यंग्य करते हुए सुनाया कि यूं तो शादीशुदा आदमी का जीवन पावन बहती सरिता है..., पर ध्यान रहे यहां हर जेठालाल के मन में एक बबीता है.. सुनाकर खूब तालिया बटोरी।

Updated on:
06 Oct 2018 01:06 pm
Published on:
06 Oct 2018 01:06 pm