Mukul Chaudhary : आईपीएल में गुरुवार रात खेले गए मुकाबले में लखनऊ सुपर जायंट्स की रोमांचक जीत के हीरो बने गुढ़ागौड़जी के मुकुल चौधरी अब इलाके की नई पहचान बनकर उभरे हैं।
गुढ़ागौड़जी (झुंझुनूं)। आईपीएल में गुरुवार रात खेले गए मुकाबले में लखनऊ सुपर जायंट्स की रोमांचक जीत के हीरो बने गुढ़ागौड़जी के मुकुल चौधरी अब इलाके की नई पहचान बनकर उभरे हैं। कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ मुश्किल हालात में उनकी मैच जिताऊ पारी के बाद गांव से लेकर जिले तक जश्न का माहौल रहा।
मैच के आखिरी ओवरों में जब लखनऊ को 18 गेंदों में 43 रन की दरकार थी और सात विकेट गिर चुके थे, तब मुकुल चौधरी ने जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने 27 गेंदों में नाबाद 54 रन ठोकते हुए हारा हुआ मैच जीत में बदल दिया। उनकी इस पारी ने उन्हें नेक्स्ट फिनिशर के तौर पर पहचान दिला दी है।
मुकुल की इस उपलब्धि के बाद गुढ़ागौड़जी में देर रात तक आतिशबाजी हुई। युवाओं ने सड़कों पर जश्न मनाया और सोशल मीडिया पर बधाइयों का सिलसिला चलता रहा। कल रात की पारी ने यह साबित कर दिया कि गुढ़ागौड़जी का यह युवा अब सिर्फ उभरता खिलाड़ी नहीं, बल्कि मैच जिताने वाला फिनिशर बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
मुकुल बताते हैं कि उनकी क्रिकेट सोच पर महेंद्र सिंह धोनी का गहरा प्रभाव है। वे कहते हैं, ‘मैं हमेशा से धोनी को देखकर सीखता आया हूं। मैं भी फिनिशर बनना चाहता हूं। उनका हेलिकॉप्टर शॉट मेरा पसंदीदा है और 2011 विश्व कप फाइनल में जिस तरह उन्होंने मैच जिताया, वैसा ही करना चाहता हूं।’ धोनी की तरह दबाव में शांत रहकर मैच खत्म करने की कला मुकुल की बल्लेबाजी में साफ नजर आई, जो कल रात की पारी में भी दिखी।
मुकुल का सफर संघर्षों से भरा रहा है। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उनके पिता दिलीप चौधरी ने अपना आरएएस अधिकारी बनने का सपना छोड़ा, कुछ समय प्रॉपर्टी का काम किया और एक ही लक्ष्य रखा बेटा क्रिकेट खेलेगा। मुकुल बताते हैं कि 2015 में जन्मदिन के दिन वे अपने पिता के साथ चूरू, झुंझुनूं और सीकर में अकादमी ढूंढते रहे और अंततः सीकर की एसबीएस क्रिकेट अकादमी में दाखिला मिला, जहां से उनका करियर आगे बढ़ा। उनके पिता का सपना था कि बेटा क्रिकेटर बने और मुकुल ने मेहनत के दम पर उसे हकीकत में बदलना शुरू कर दिया है।
मुकुल चौधरी ने बताया कि उनके पिता दिलीप चौधरी ने उन्हें बताया था कि उनकी शादी से पहले ही यह सपना था कि अगर बेटा होगा तो क्रिकेटर बनाऊंगा। मेरे पापा मुझे बार बार इसी बात को याद दिलाते थे। इस कारण मैने 12 साल की उम्र में पहली बार क्रिकेट खेलना शुरू किया था।
बहुत परेशानी आई लेकिन मुसीबतों से लड़ते गए और आज यह दिन मिला। गुरुवार को जब मैं मैच में उतरा तो मेरा मानस पहले से तय था कि मुझे आक्रामक खेलना है। उसी की बदौलत मैच जीत पाए। मेरे आइडल हमेशा से ही धोनी रहे हैं।