INST Scientist ‘F’ recruitment 2018, इंस्टीटयूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी ( INST ), डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, मोहाली (पंजाब) ने साइंटिस्
INST Scientist ‘F’ recruitment 2018, इंस्टीटयूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी ( INST ), डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, मोहाली (पंजाब) ने साइंटिस्ट-एफ के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इच्छुक व योग्य उम्मीदवार दिए गये प्रारूप में 14 जून 2018 तक या इससे पहले आवेदन कर सकते हैं।आवेदन आैर अन्य जानकारी के लिए नीचे दिए गए अधिसूचना विवरण लिंक पर क्लिक करें।
इंस्टीटयूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी ( INST ) में रिक्त पदाें का विवरण:
साइंटिस्ट एफ- 1 पद
इंस्टीटयूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INST) में साइंटिस्ट-एफ के रिक्त पदाें पर आवेदन करने के लिए शैक्षणिक योग्यता:
उम्मीदवार के पास नेचुरल/एग्रीकल्चर/इंजीनियरिंग/मेडिकल साइंसेज या नैनोसाइंस/टेक्नोलॉजी में डॉक्टरेट डिग्री होना आवश्यक है। मेडिकल प्रोफेशनल होने की स्थिति में उम्मीदवार के पास एमडी डिग्री या एमसीआई द्वारा मान्यता प्राप्त समकक्ष योग्यता होना आवश्यक है।
शैक्षणिक योग्यता एवं अनुभव के सम्बन्ध में अन्य जानकारी के लिए नीचे दिए विस्तृत अधिसूचना लिंक पर क्लिक करें।
इंस्टीटयूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INST) में साइंटिस्ट-एफ के रिक्त पदाें पर आवेदन कैसे करें:
योग्य उम्मीदवार आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना आवेदन इंस्टीटयूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INST) हैबिटैट सेंटर, सेक्टर-64, फेज-X, मोहाली- 160062, पंजाब के पते पर 14 जून 2018 तक भेज सकते हैं।
महत्वपूर्ण तिथि:
आवेदन की अंतिम तिथि- 14 जून 2018
INST Scientist ‘F’ recruitment notification 2018:
इंस्टीटयूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INST), डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, मोहाली (पंजाब) में साइंटिस्ट-एफ के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए विस्तृत अधिसूचना यहां क्लिक करें।
इंस्टीटयूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INST) का परिचयः
नैनो प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई देश का एक अग्रणी संस्थान है। हाल ही में नैनो प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान का अनुसंधान केंद्र निर्माण कर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई ने अपनी नैनो प्रौद्योगिकी अनुसंधान गतिविधियों को सबल बनाया है। इस केंद्र का निर्माण भारत सरकार, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के उदारतापूर्ण अनुदान से संभव हो सका है।