इसके अलावा तस्वीर भी इतनी धुंधली आती है कि आरोपी की पहचान ही नहीं हो पाती है।
कुणाल पुरोहित/जोधपुर. मथुरादास माथुर अस्पताल में सक्रिय चोर गिरोह और लपकों पर अंकुश लगाने के तमाम दावे फेल होते नजर आ रहे हैं। इसकी वजह है अस्पताल प्रशासन की ओर से सीसीटीवी कैमरों को लेकर बरती जा रही लापरवाही। इतना ही नहीं, मथुरादास माथुर अस्पताल के सबसे व्यस्त रहने वाले ट्रोमा सेंटर का भी यही हाल है। अस्पताल में जगह-जगह केवल दिखावे के लिए सीसीटीवी कैमरे जरूर लगे हुए हैं, लेकिन पिछले काफी समय से वे खराब पड़े हैं। जो इक्का दुक्के कैमरे चालू हैं। उनमें रिकॉर्डिंग नहीं हो पाती। इसके अलावा तस्वीर भी इतनी धुंधली आती है कि आरोपी की पहचान ही नहीं हो पाती है।
स्थिति यह है कि अस्पताल चौकी प्रबंधन कई बार इन सीसीटीवी कैमरों को सही करवाने के लिए अधीक्षक से मांग कर चुका हैं, लेकिन हर बार कैमरे सही करवाने की मांग को नजरअंदाज कर दिया गया। चोरी की वारदातों का सबसे ज्यादा शिकार ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज के साथ आए परिजन हो रहे हैं। सूत्रों की मानें तो हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगने के बाद अस्पताल परिसर में कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए थे। कुछ दिनों तक अस्पताल चौकी में इसकी मॉनिटरिंग भी हुई, लेकिन सीसीटीवी कैमरे खराब हो जाने के कारण यह मॉनिटरिंग ज्यादा दिनों तक नहीं चली।
नहीं हो रही सीसीटीवी कैमरों की मेंटेनेस
जानकारों की मानें तो अस्पताल में लगे हुए सीसीटीवी कैमरों के रख-रखाव के लिए एक निजी फर्म को ठेका दिया हुआ है। लेकिन अस्पताल प्रशासन ने 10-11 महीनों से उसे भुगतान ही नहीं किया। इस कारण ठेकेदार ने काम बंद कर दिया। उसके बाद से ही अस्पताल के ट्रोमा और पूछताछ सहित कई जगहों पर सीसीटीवी कैमरे खराब और बंद पड़े हैं। इतना ही नहीं, कई सीसीटीवी कैमरों के वायर तक टूटे हुए हैं। इसके अलावा रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने उचित क्षमता वाली हार्ड disk भी नहीं है। जो लंबी रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रख सके।
सीसीटीवी खराब, बंद टीवी की निगरानी कर रही पुलिस
काफी समय से अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे में अस्पताल चौकी बंद पड़ी टीवी की निगरानी कर रहा है। यह टीवी वह अस्पताल प्रशासन को वापस इसलिए नहीं लौटा सकते, क्योंकि कैमरे हाइकोर्ट के आदेश पर लगे थे। ऐसे में टीवी इधर उधर नहीं हो जाए। इसलिए उसे मजबूरी में अस्पताल चौकी में बंद कमरे में रखा गया है।