विस्थापितों के पुनर्वास बाबत दायर जनहित याचिका निस्तारित
जोधपुर . बांसवाड़ा व डूंगरपुर जिलों में वर्ष 1979 में निर्मित माही बजाज सागर व गुजरात में निर्मित कडाना बांध के कारण विस्थापित हुए सैकड़ों लोगों को वैकल्पिक कृषि व रिहाइशी जमीन दी गई, लेकिन अनपढ़ व अशिक्षा के चलते फिर भी सैकड़ों विस्थापितों को न तो जमीन मिली और न ही मुआवजा। ऐसे लोगों की ओर से दायर जनहित याचिका का निस्तारण करते हुए मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नन्द्राजोग व न्यायधीश रामचन्द्रसिंह झाला की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान प्राप्त हुए माही बांध के लिए 436 व कडाना बांध के 54 विस्थापितों को नवंबर 2017 तक वैकल्पिक जमीन मुहैया कराने के निर्देश दिए।
वर्ष 2004 व 2014 में दायर खांडू के विस्थापितों व वर्ष 2011 में दायर माही कड़ाना व अन्य पुनर्वास समिति के संरक्षक बांसवाड़ा निवासी वीरसिंह की ओर से दायर जनहित याचिका में से पहली दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया गया, जबकि तीसरी याचिका का निस्तारण करते हुए खंडपीठ ने उक्त निर्देश जारी किए। आदेश के अनुसार शेष रहे विस्थापितों से आवेदन प्राप्त करने के लिए जारी की गई सूचनाओं के बाद कुल 1729 आवेदन प्राप्त हुए। इनको संबंधित तहसीलों में छंटनी के लिए भेज दिया गया। 14 जनवरी 2016 को प्राप्त जांच रिपोर्ट के अनुसार कुछ को पहले से जमीन आवंटित थी, तो कुछ को आवंटन हो गया, लेकिन कब्जा नहीं दिया गया। बहरहाल इसके बावजूद अशिक्षा एवं सूदुर गांवों में रहने के कारण देखते हुए कोर्ट ने फिर 4 अगस्त 2017 को आदेश जारी कर बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ व उदयपुर जिलों में 9 से 31 अगस्त 2017 तक शिविर लगवाए।
इसके फलस्वरूप माही बजाज सागर बांध के विस्थापितों की 436 व कडाना बांध के विस्थापितों की 54 आवेदन मिले। जिनको किन्हीं कारणों से कब्जा नहीं दिया गया था। अब अप्रार्थी सरकार की ओर से प्राप्त आश्वासन के अनुसार इन सभी को नवंबर 2017 तक कब्जा दे दिया जाएगा। खंडपीठ ने आरंभ में प्राप्त उन सभी 1729 आवेदनों को अतिरिक्त मुख्य सचिव राजस्व विभाग के पास भेजते हुए व्यक्तिगत रूप से जांच कर प्रत्येक को कारण सहित जवाब देने के निर्देश भी दिए। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सुनील बेनिवाल व सुधांशु शर्मा व सरकार की ओर से एएजी केएल ठाकुर व उनके सहयोगी ऋषभ तायल ने पैरवी की।
आदेश की पालना नहीं करने पर बीमा कंपनी के जीएम को किया तलब
जिला उपभोक्ता संरक्षण मंच, जोधपुर ने आदेश की जानबूझ कर अवहेलना करने पर नेशनल इंश्योरेंस कम्पनी के महाप्रबंधक दिलबाग सिंह को आगामी सोमवार को मंच के समक्ष हाजिर होने का आदेश दिया है। मंच ने 24 नवम्बर को रुकमा कंवर का परिवाद मंजूर करते हुए उनके दुर्घटनाग्रस्त ट्रेलर का बीमा दावा खारिज किए जाने पर नेशनल इंश्योरेंस के महाप्रबंधक को एक माह में 10 लाख 52 हजार 625 रुपए मय 9 फीसदी ब्याज व 8 हजार रुपए व्यय अदा करने के आदेश दिए थे।
आयोग के निर्णय पर रोक
बीमा कम्पनी की ओर से इसके खिलाफ राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर किए जाने पर अयोग के एक सदस्य ने गत 8 मार्च को मंच के आदेश पर रोक लगा दी। जिस पर प्रार्थी ने राजस्थान उच्च न्यायालय में यह कहकर रिट याचिका दायर की कि आयोग का एक सदस्य आदेश पारित नहीं कर सकता। इस पर न्यायाधीश संगीत लोढ़ा ने अधिवक्ता अनिल भण्डारी के तर्क को मानते हुए 24 मार्च को आयोग के आदेश पर रोक लगा दी। इससे उपभोक्ता मंच का अदेश प्रभावी रहा, लेकिन अब तक बीमा कंपनी ने मंच के आदेश की पालना नहीं की।