लूनी पुलिस थाने में पांड्या के खिलाफ अप्रेल माह में एससी एसटी एक्ट की धाराओं में दर्ज की गयी थी एफआइआर
जोधपुर. इंगलैंड में भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम की विजय की धुरी बने बडोदरा के क्रिकेटर हार्दिक पांड्या की ओर से सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर विविध अपराधिक याचिका की राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ में गुरुवार को सुनवाई तय थी। समयाभाव के कारण मामले की सुनवाई नहीं हो सकी तथा मामला नॉट रीच रहा। ऐसे में अब इस मामले की अगली सुनवाई नियमानुसार लिस्टिंग होने पर ही हो सकेगी, लेकिन तब तक के लिए मामले में पूर्व में जारी अंतरिम राहत जारी रहेगी। मामले के अनुसार गुजरात में बडोदरा स्थित बापूनी दरगा, गोरवा निवासी हिमांशु पांड्या के पुत्र हार्दिक पांड्या ने अप्रैल माह में एक विविध अपराधिक याचिका दायर करते हुए कहा कि उसके खिलाफ लूनी पुलिस थाने में लूनी तहसील के संरेचा गांव निवासी देवाराम मेघवाल की ओर से अंडर सेक्शन 3 (1) (4 ) ऑफ एससी एसटी (प्रिवेंशन ऑफ एट्रोसिटीज एक्ट) 1989 के तहत एक एफआईआर 49/2018 दायर की गयी है जिसमें आईपीसी की धाराओं 124 (ए) 153 (ए) 295( ए) 505 व 120 (बी) धाराएं जोडी गयी हैं।
एफआइआर में पांड्या पर उसके ट्विटर हैंडल से भारत रत्न बाबा साहेब अंबेडकर के खिलाफ अपशब्द लिखने का आरोप लगाते हुए कहा गया है कि इससे उनके वर्ग समाज की भावनाएं अत्यंत ही आहत हुई हंै। पहली ही सुनवाई में पांड्या की ओर से कहा गया कि जिस ट्विटर हैंडल से उक्त पोस्ट जारी करने का आरोप लगाया जा रहा है वह उनकी है ही नहीं तथा किसी फर्जी अकाउंट से उनके नाम से इस तरह की शरारत की गयी लगती है। इस पर 13 अप्रैल 2018 को जस्टिस विजय विश्नोई ने संम्बंधित पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया तथा अगली सुनवाई तक लूनी पुलिस थाने में पांड्या के खिलाफ दायर एफआर में किसी तरह की अग्रिम प्रोसिडिंग्स पर अंतरिम रोक लगा दी। मामले की अगली सुनवाई 21 मई तथा 16 जुलाई को भी हुई लेकिन सुनवाई आगे नहीं बढ सकी और अंतरिम राहत जारी रही।