
फलोदी-फलोदी-जैसलमेर ट्रेनों को रफ्तार देने की कवायद हुई शुरू।
फलोदी। सामरिक और पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण राजस्थान के फलोदी-जैसलमेर रेलखंड पर उत्तर पश्चिम रेलवे ने ट्रेनों की गति बढ़ाने का बड़ा निर्णय लिया है। अब इस सेक्शन पर मेल एवं एक्सप्रेस ट्रेनें 100 किलोमीटर प्रति घंटा की बजाय 110 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से दौड़ेंगी। इससे यात्रियों को अधिक तेज, सुगम और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह नई गति सीमा फलोदी-जैसलमेर सेक्शन के किलोमीटर 134.29 से 290.46 तक कुल 156.17 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर लागू की जाएगी। इसके लिए रेलवे बोर्ड से स्वीकृति मिल चुकी है और आवश्यक तकनीकी एवं संरक्षा व्यवस्थाएं पूरी होते ही इसे लागू कर दिया जाएगा।
जोधपुर अपर मंडल रेल प्रबंधक करनीराम ने बताया कि वर्तमान में इस सेक्शन पर ट्रेनों की अधिकतम गति 100 किलोमीटर प्रति घंटा है, जिसे बढ़ाकर 110 किलोमीटर प्रति घंटा किया जा रहा है। इससे मेल, एक्सप्रेस और यात्री ट्रेनों के संचालन में गति आएगी और यात्रियों का यात्रा समय कम होगा।
रेलवे के अनुसार गति वृद्धि से प्रत्येक ट्रेन के संचालन समय में लगभग 9 मिनट की बचत होगी। रेलवे प्रशासन का कहना है कि इस बचत समय का उपयोग ट्रैक रखरखाव और संरक्षा कार्यों को और मजबूत करने में किया जाएगा।
ट्रैक मेंटेनेंस को प्राथमिकता देते हुए रेलवे ने प्रतिदिन ढाई से तीन घंटे का कॉरिडोर ब्लॉक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि पटरियों का नियमित और गुणवत्तापूर्ण रखरखाव किया जा सके। इससे रेल संरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी।
उत्तर पश्चिम रेलवे मुख्यालय के आदेश के अनुसार नई गति व्यवस्था लागू करने से पहले ट्रैक, ब्रिज, ओएचई और सिग्नलिंग सिस्टम से जुड़े सभी सुरक्षा प्रमाणपत्रों की शर्तों का पालन अनिवार्य होगा। इसके अलावा 20 स्थानों पर वाइल्ड सिस्टम स्थापित करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
रेल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में संचालित लोको और कोच अपनी अनुमत अधिकतम गति अथवा 110 किलोमीटर प्रति घंटा, जो भी कम होगी, उसी सीमा में संचालित किए जाएंगे।
नई व्यवस्था के तहत लूप लाइनों पर यूनिमेट ब्लॉक देने का अधिकार स्टेशन मास्टरों को देने की तैयारी है। साथ ही डीआरएम कार्यालय को समय पर ट्रैक रखरखाव के लिए कॉरिडोर ब्लॉक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि रेल संरक्षा और ट्रैक गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। रेलवे के इस निर्णय को सीमावर्ती क्षेत्र में रेल संचालन को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
Published on:
08 May 2026 01:49 pm
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