जोधपुर जेल में पुलिस की नाक के नीचे चल रहा है जुर्म का वो घिनौना खेल, जिसे जान हो जाएंगे भौचक्के

जोधपुर सेंट्रल जेल अंग्रेजों के जमाने की जेल है और देश में काफी सुरक्षित भी मानी जाती है। लेकिन अब यहां पुलिस की नाक के नीचे ही जुर्म का घिनौना खेल खेला जा रहा है। साजिशों को अंजाम देने के लिए अपराधियों ने एेसे हथकंडे अपनाने शुरू कर दिए हैं कि आप भौंचक रह जाएंगे।

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Jun 30, 2017
Jodhpur Central Jail

किसी भी आपराधिक वारदात के बाद पुलिस बदमाश को पकड़ कर कोर्ट के माध्यम से न्यायिक अभिरक्षा के तहत जेल भिजवा देती है, लेकिन जेल पहुंचने के बाद व्यवहार में सुधार के बजाय बंदी और अधिक अनियंत्रित होने लगे हैं। अब अपराधियों ने अपराध करने के नये-नये तरीके निकाल लिए हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से पुलिस की नाक के नीचे ही जुर्म का नेटवर्क चलने का खुलासा हुआ है।


जोधपुर सेंट्रल जेल में बेअसर साबित हो रहे 2-जी मोबाइल जैमर का फायदा उठा कर बंदी एन्ड्रॉयड मोबाइल के माध्यम से धड़ल्ले से मोबाइल काम में ले रहे हैं। इतना ही नहीं, पुलिस की पकड़ में आने से बचने के लिए बंदी और कैदी व्हाट्सएप के जरिये बाहर गिरोह संचालित कर रहे हैं। वे जेल में चल रहे मोबाइल कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं। हालांकि जेल प्रशासन का दावा है कि पिछले कुछ समय से जोधपुर जेल में मोबाइल का इस्तेमाल करने में कमी आई है।

इंटरनेट कॉल या व्हाट्सएप से सम्पर्क

गत मार्च में चिकित्सक व ट्रैवल्स मालिक के मकान पर फायरिंग करने के मामले की जांच में यह तथ्य सामने आया था कि लॉरेंस व उसके गुर्गे इंटरनेट कॉल या व्हाट्सएप से एक-दूसरे से सम्पर्क में हैं। जेल में 2-जी जैमर लगे हुए हैं, लेकिन एंड्रॉयड फोन के लिए ये जैमर बेअसर हैं। इसी का फायदा उठा कर जेल में बंदी और कैदी एंड्रॉयड फोन से आराम से गिरोह चला रहे हैं। पुलिस के लिए इंटरनेट कॉल या व्हाट्सएप को ट्रैस कर पाना मुश्किल भरा हो रहा है। इतना ही नहीं, जेल में बंदी मोबाइल के जरिये एक-दूसरे के साथ भी सम्पर्क में हैं।

मोबाइल व सिम मिलने के दस मामले दर्ज

जोधपुर सेन्ट्रल जेल में पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की समय-समय पर तलाशी में बड़ी संख्या में मोबाइल व सिम बरामद हो चुके हैं। इस संबंध में रातानाडा थाने में वर्ष 2016 व 2017 में अब तक दस एफआईआर दर्ज हो चुकी है।

जेल में मोबाइल पर रचीं प्रमुख वारदातें

- जून 2014 : भंवरीदेवी प्रकरण के आरोपियों की पेशी के दौरान अदालत परिसर में फायरिंग कर आरोपी कैलाश जाखड़ को भगा कर ले गए थे। जिसे पुलिस ने जुलाई में गिरफ्तार किया था। कैलाश व उसके साथी बिशनाराम को भगाने की जेल में मोबाइल पर ही साजिश रची गई थी।

- मार्च 2017 : जोधपुर जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई के गुर्गों की लूट के आरोपी हरेन्द्र चौधरी से जान-पहचान हुई। फिर हरेन्द्र का सम्पर्क पंजाब जेल के फरीदकोट जेल में बंद लॉरेंस से हुआ। इन लोगों ने रंगदारी के लिए जोधपुर के नामचीन लोगों को चुना। फिर कैलाश मांजू की मदद से 17 मार्च की सुबह डॉ सुनील चाण्डक व मनीष जैन के मकान पर फायरिंग की गई थी।

- जून 2017 : 19 जून को सरदारपुरा व 20 जून को शास्त्रीनगर में फायरिंग मामले में भी पुलिस को अंदेशा है कि तार जेल से जुड़े हैं। यही वजह है कि पंजाब के कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस को अजमेर की घुघरा घाटी की हाई सिक्योरिटी जेल शिफ्ट किया गया है।

दीवार के ऊपर से फेंक देते हैं

जेल के मुख्य द्वार व मुलाकात कक्ष में कड़ी निगरानी के चलते अब जेल की साइड वाली दीवार से आपत्तिजनक सामग्री फेंक देते हैं। पिछले दिनों 21 मोबाइल सिम बरामद की गई थी। जिसकी जांच की जा रही है। जेल में मोबाइल उपयोग में बहुत कमी आई है। मैन पॉवर पर्याप्त हो तो इस स्मया पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकती है। -विक्रमसिंह, जेल, डीआईजी

Published on:
30 Jun 2017 05:12 pm
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