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Rajsamand: वेडिंग सीजन में LPG किल्लत से बिगड़ा गेम, तैयारियों में डेकोरेशन नहीं, गैस सिलेंडर पर फोकस

Gas Cylinder Crisis: शादी का सीजन जहां खुशियों और तैयारियों का समय होता है, वहीं इस बार रसोई गैस की कमी ने इन खुशियों में खलल डालने का काम कर दिया है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, मेटा एआइ

प्रतीकात्मक तस्वीर, मेटा एआइ

Gas Cylinder Crisis: शादी का सीजन जहां खुशियों और तैयारियों का समय होता है, वहीं इस बार रसोई गैस की कमी ने इन खुशियों में खलल डालने का काम कर दिया है। शहर और आसपास के इलाकों में सिलेंडर की अनियमित आपूर्ति ने हालात ऐसे बना दिए हैं कि लोग शादी की तैयारियों से ज्यादा गैस की व्यवस्था को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं। आगामी दिनों में शादियों की धूम शुरू होगी, बड़े भोजन के आयोजन होंगे। लेकिन ये कैसे होंगे इसको लेकर चिंता बरकरार है, क्योंकि सरकार के निर्देशों के बाद गैस सिलेंडरों की आपूर्ति नियमानुसार कर दी है।

ऐसे में शादियों वाले परिवार खुशी से ज्यादा सिलेंडर ना मिलने पर चिंतित नजर आ रहे हैं। ऐसे में वे गैस सिलेंडर जुटाने की जुगत में लग गए हैं। एक बड़े आयोजन में भोजन बनाने के लिए आमतौर पर 15 से 20 गैस सिलेंडर की जरूरत पड़ती है, लेकिन मौजूदा हालात में इतनी संख्या में सिलेंडर एक साथ मिलना मुश्किल हो रहा है। कई आयोजकों को बुकिंग के बावजूद समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहे, जिससे पूरी किचन व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

रिश्तेदारों से ‘एक्स्ट्रा सिलेंडर’ की तलाश

शादी वाले घरों में अब कपड़े और सजावट से ज्यादा चिंता गैस सिलेंडर की हो गई है। कई परिवार अतिरिक्त सिलेंडर वाले रिश्तेदारों और परिचितों से संपर्क कर रहे हैं। वहीं, कुछ लोग पूरी जिम्मेदारी कैटरर्स को सौंप रहे हैं। कई स्थानों पर एक ही दिन में 2-3 शादियां होने के कारण कैटरर्स एक जगह खाना बनाकर अलग-अलग कार्यक्रमों में सप्लाई कर रहे हैं।

बुकिंग के बाद भी देरी, घरों की रसोई भी प्रभावित

घरेलू उपभोक्ताओं का कहना है कि सिलेंडर बुक कराने के बाद भी 2 से 4 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है। इससे रोजमर्रा की रसोई व्यवस्था तक प्रभावित हो रही है। राजसमंद मेंं लाखों उपभोक्ता इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम की एजेंसियों पर निर्भर हैं, लेकिन बढ़ती मांग ने वितरण प्रणाली पर दबाव बढ़ा दिया है।

महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने की मजबूरी

कैटरिंग व्यवसाय से जुड़े लोगों का कहना है कि कार्यक्रम के दौरान अचानक गैस खत्म हो जाने पर उन्हें बाजार से ऊंचे दामों पर सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं। लगातार चल रही रसोई भट्टियों के कारण खपत बढ़ रही है, जिससे लागत भी तेजी से बढ़ रही है। वहीं सामान्य तरह से घरों में काम आने वाले सिलेंडर की रेट में भी काफी अंतर आ गया है। लोगों ने बताया कि सिलेंडर के पेटे एक हजार से अधिक रुपए लिए जा रहे हैं। जिससे आमजन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।

रसद विभाग में 15 से ज्यादा आवेदन

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राजसमंद जिला रसद अधिकारी कार्यालय में अब तक 15 से अधिक आवेदन शादी-समारोह के लिए अतिरिक्त सिलेंडर उपलब्ध कराने के लिए आ चुके हैं।
प्रशासन शादी की नजदीकी तारीख वाले मामलों को प्राथमिकता देते हुए 2-3 अतिरिक्त सिलेंडर उपलब्ध करा रहा है, लेकिन यह जरूरत के मुकाबले नाकाफी साबित हो रहा है।

प्रशासन सतर्क, लेकिन चुनौती बरकरार

गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि कंपनियों की ओर से नियमित आपूर्ति की जा रही है और मांग के अनुसार वितरण किया जा रहा है। प्रशासन भी कालाबाजारी रोकने के लिए नजर बनाए हुए है, लेकिन उपभोक्ताओं और कैटरर्स का कहना है कि अगर जल्द ही व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में शादी समारोहों में भोजन व्यवस्था करना और भी मुश्किल हो जाएगा।