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वंदे मातरम् पर बवाल: वकील ने दिया SC का हवाला- गाएं न गाएं आपकी इच्छा, अपमान नहीं होना चाहिए

MP Vande Mataram Controversy: एमपी की दो मुस्लिम पार्षदों ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम गाने से किया इनकार, एमपी में गरमाई सियासत, मंत्री सारंग ने दिया विवादित बयान, तो एडवोकेट ने बताया सुप्रीम कोर्ट का फैसला...

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Vande Mataram Controversy

Vande Mataram Controversy(photo:freepik)

MP Vande Mataram Controversy: नगर निगम के बजट सत्र में बुधवार को वंदे मातरम् नहीं गाने पर शुरू हुआ विवाद सियासी टकराव में बदल गया। कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम व रुबीना खान पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई। भाजपा पार्षद दल ने संभागायुक्त को ज्ञापन देकर उनकी पार्षदी समाप्त करने और केस दर्ज कराने की मांग की। पार्षदों ने एमजी रोड थाने में सामूहिक वंदे मातरम् गाया, शिकायत की।

निगम सभापति ने संभाग आयुक्त को लिखा पत्र

इंदौर निगम सभापति मुन्नालाल यादव ने भी संभागयुक्त को पत्र लिखकर दोनों पार्षदों को पद से हटाने और केस दर्ज कराने की मांग की। पार्षदों की इस हरकत के खिलाफ खेल मंत्री विश्वास सारंग भी कूद पड़े। उन्होंने मीडिया से कहा, हिंदुस्तान में रहना है तो वंदे मातरम् गाना ही होगा। सारंग ने कहा, यह गीत धर्म विशेष का नहीं है। राष्ट्र भावना का प्रतिनिधित्व करता है। जो मातृभूमि की इज्जत नहीं करता उसे जीने का अधिकार नहीं। वो पाकिस्तान चले जाएं।

'गाएं न गाएं, अपमान नहीं होना चाहिए'

एडवोकेट अभिनव धनोतकर ने बताया, केंद्र सरकार ने सर्कुलर जारी कर सभी संस्थानों और कार्यक्रमों में वंदेमातरम् गायन अनिवार्य किया था। इस पर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर को निराकृत कर कहा था कि वंदेमातरम् गायन में आप शामिल हों या न हों। आपकी इच्छा पर है। लेकिन अपमान नहीं होना चाहिए।

कांग्रेस में मतभेद

वंदे मातरम् विवाद पर कांग्रेस में भी मतभेद खुलकर सामने आए हैं। कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने इसे राजनीतिक ब्लैकमेलिंग बताया, छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक विभाग के प्रभारी अमीनुल खान सूरी ने कहा कि दोनों पार्षदों की बात का तरीका गलत था, लेकिन वंदे मातरम की अनिवार्यता का आदेश उचित नहीं है। सूरी ने मामले में कांग्रेस शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे के फैसले पर भी सवाल उठाए।

जानें मुस्लिम क्यों करते हैं राष्ट्रगीत गाने का विरोध

राष्ट्रगीत का अर्थ: 'वंदे' का अर्थ वंदना या पूजा करना है। इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, सजदा या वंदना केवल अल्लाह के सामने ही की जा सकती है, किसी और के सामने नहीं।

मूर्ति पूजा का निषेध: इस गीत में मातृभूमि को मां दुर्गा या देवी के रूप में चित्रित किया गया है, जो इस्लाम के एकेश्वरवाद (एक ही ईश्वर) के सिद्धांत के विरुद्ध है।

विकल्प भी: मुसलमान अपनी मातृभूमि के प्रति सम्मान और प्रेम को 'मादरे वतन जिंदाबाद' (मातृभूमि की जय) कहकर व्यक्त करते हैं।

इतिहास में भी दर्ज है विरोध: 1937 में भी मौलाना अबुल कलाम आजाद और अन्य मुस्लिम विद्वानों ने इसके कुछ अंशों को अपनी आस्था के खिलाफ बताते हुए इसका विरोध जताया था