पश्चिमी राजस्थान का हैंडीक्राफ्ट उद्योग विदेशों में खासा लोकप्रिय है।
जोधपुर . एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फोर हैंडीक्राफ्ट (ईपीसीएच) जल्द ही देश के हस्तशिल्प निर्यातकों के लिए 'हैण्डीक्राफ्ट टेक्नोलॉजी मिशन' शुरू करने जा रहा है। केन्द्र सरकार की स्वीकृति मिलने के बाद इसकी रूपरेखा तैयार कर रहा है। इससे भारतीय निर्यातकों को फायदा होगा। इस मिशन से जोधपुर के हस्तशिल्प निर्यातकों को बहुत फायदा होगा। उल्लेखनीय है कि पश्चिमी राजस्थान का हैंडीक्राफ्ट उद्योग विदेशों में खासा लोकप्रिय है। विदेशी ग्राहकों को यहां की लकड़ी से बने उत्पाद हमेशा से लुभाते आए हैं। लेकिन नोटबंदी और जीएसटी से पिछले दिनों हैंडीक्राफ्ट व्यवसाय को धक्का लगा था। अब इस मिशन से निर्यातकों में नई उम्मीद जागी है। इस मिशन के क्रियान्वयन से निर्यातकों सहित उद्योग को नए पंख लगेंगे। इससे होने वाले फायदों से देश की आर्थिक स्थिति में भी मजबूती आएगी।
ईपीसीएच कर रहा अध्ययन
ईपीसीएच निर्यातकों की टेक्नोलॉजी से संबंधित जरूरतों का अध्ययन कर रहा है। कई संगठन, संस्थाएं इस मिशन का हिस्सा बनेंगी। हस्तशिल्प उद्योग में काम आने वाली नवीनतम मशीनरी निर्यातकों की इकाइयों में लगाई जाएंगी। सरकार की ओर से निर्यातकों को अनुदान राशि भी दी जाएगी।
इसलिए शुरू होगा मिशन
प्रतिस्पर्धा के दौर में निर्यातकों को क्वालिटी व कीमत को बायर फ्रेण्डली रखना पड़ता है। ज्यादातर विदेशी ग्राहक उत्पाद की कीमत को लेकर बहुत सजग हैं और अन्य देशों के उत्पादों से तुलना करते हैं। इन बातों को ध्यान में रखते हुए ईपीसीएच की ओर से 'हैण्डीक्राफ्ट टेक्नोलॉजी मिशन' शुरू किया जाएगा।
जोधपुर हैण्डीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव मनीष पुरोहित ने बताया कि इस मिशन से निर्यातकों को कीमत व गुणवत्ता निर्धारण करने में राहत मिलेगी। निर्यात को बढ़ावा मिलेगा व निर्यातकों, आर्टिजनों व कारीगरों को कई सुविधाए मिलेंगी। आने वाले कुछ ही सालों में हैण्डीक्राफ्ट निर्यात दुगुना होने की संभावना है।
मिशन के फायदे
- हस्तशिल्प निर्यात बढ़ाने पर जोर।
- आर्टिजनों की आमदनी व लिविंग स्टैण्डर्ड बढ़ाना ।
- निर्यातकों को मार्केट, टेक्नोलॉजी, इंफ्रास्ट्रक्चर, कैपेसिटी बिल्डिंग व उत्पादन गुणवत्ता में सहायता।
- उत्पाद गुणवत्ता बढ़ाने के लिए नई तकनीक वाली मशीनरी का उपयोग।
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