जोधपुर

बड़ा खुलासा : जेएनवीयू में 29 साल से नौकरी कर रहे 40 कर्मचारियों की नियुक्ति फर्जी

वेतन व भत्तों के रूप में बंटे करोड़ों रुपए वसूल करने के आदेश  

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जोधपुर . जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में शिक्षक भर्ती घोटाले के समकक्ष एक और बड़ा घोटाला सामने आया है। विवि के विभिन्न संकायों और विभागों में 29 साल से सेवाएं दे रहे 40 अशैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति को राज्य सरकार ने गैर विधिसम्मत करार दिया है। सरकार ने इन 40 कर्मचारियों पर कार्रवाई करने के साथ इनको नियमित करने में लगे अधिकारियों व कार्मिकों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सरकार ने कहा है कि इन 40 कर्मचारियों को अब तक दिए गए करोड़ों रुपए के वेतन और भत्तों की रिकवरी की जाए। विवि ने इस जांच रिपोर्ट को सिंडीकेट बैठक में रखा।

सिंडीकेट ने विवि के रजिस्ट्रार को जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई करने का अधिकार दे दिया। रजिस्ट्रार ने कार्रवाई से पहले राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता से विधिक राय मांगी है। गौरतलब है कि इस संबंध में खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल ने विधानसभा में नियम १३१ के अंतर्गत ध्यानाकर्षण प्रस्ताव रखा था। इसके बाद राज्य सरकार ने उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की थी।

एएजी से मांगी है राय

हमने इस मामले में राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता पीआर सिंह ने विधिक राय मांगी है। उनकी राय के बाद ही विवि ४० कर्मचारियों के साथ इनके नियमितिकरण में शामिल अधिकारियों व कार्मिकों पर कार्रवाई करेगा।


प्रो. प्रदीप शर्मा, कार्यवाहक रजिस्ट्रार, जेएनवीयू

नकल के आरोप साबित न होने पर छात्रों का परिणाम जारी करने का निर्णय


जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय में शनिवार को आयोजित सिंडिकेट की बैठक में जेएनवीयू से संबद्ध ९ कॉलेजों के सामूहिक नकल प्रकरण को लेकर आरोप साबित नहीं होने पर कई छात्रों के परिणाम जारी करने का फैसला किया गया है। कुलपति प्रो. आरपी सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभिन्न एजेंडों पर चर्चा हुई।

सामूहिक नकल प्रकरण को लेकर विवि की ओर से नकल प्रकरण सुनवाई कमेटी गठित की गई थी। कमेटी की रिपोर्ट सिंडिकेट की बैठक में रखी गई। इसकी जांच में नकल के आरोप साबित न होने पर कई छात्रों को परिणाम जारी करने का निर्णय सुनाया गया। हालांकि इन छात्रों की संख्या नहीं बताई गई।


डिग्रियों का अनुमोदन

बैठक के दौरान वर्ष 2016 की स्नातक और स्नातकोत्तर की 39260 डिग्रियों का अनुमोदन किया गया। साथ ही प्रस्तावित रिसर्च बोर्ड की पीएचडी - डीलिट की उपाधि का भी अनुमोदन किया गया। वहीं बैठक में यह प्रस्ताव लिया गया कि अगर स्नातक और स्नोतकोत्तर डिग्रियों के लिए अकादमिक परिषद की बैठक से पूर्व किसी विद्यार्थी को डिग्री की आवश्यकता है तो उसे कुलपति को प्रदत्त अधिकार 12/5 के अंतर्गत कुलपति की ओर से डिग्री प्रदान की जा सकेगी। यह प्रस्ताव बैठक में पास कर लिया गया। बैठक में प्रो. अर्जुनलाल गर्ग, प्रो. पूनम बावा, प्रो. चंदनबाला, प्रो. एस.के. परिहार व छात्रसंघ अध्यक्ष कांता ग्वाला मौजूद थीं।

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Published on:
13 Nov 2017 03:17 pm
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