10 मई 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Jodhpur Foundation Day: जोधपुर की शान है मेहरानगढ़ किला, 400 फीट ऊंची पहाड़ी पर बना, जानिए अनसुनी बातें

Mehrangarh Fort: जोधपुर 12 मई को अपना स्थापना दिवस मना रहा है। सालों पुराना मेहरानगढ़ किला आज भी शहर की आन, बान और गौरवशाली इतिहास की पहचान बना हुआ है।

2 min read
Google source verification
Mehrangarh Fort

मेहरानगढ़ किला। फाइल फोटो- पत्रिका

जोधपुर। 12 मई को जोधपुर अपना स्थापना दिवस मनाने जा रहा है। मरुधरा का यह ऐतिहासिक शहर अपनी संस्कृति, विरासत और भव्य किलों के लिए दुनियाभर में पहचाना जाता है। पश्चिमी राजस्थान के सबसे बड़े शहर जोधपुर की पहचान मेहरानगढ़ किले से जुड़ी हुई है। शहर की ऊंची पहाड़ी पर बना यह विशाल किला आज भी राठौड़ शासकों के गौरव और शौर्य की कहानी सुनाता है। हर साल बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटक इस ऐतिहासिक धरोहर को देखने जोधपुर पहुंचते हैं।

कई किलोमीटर दूर से दिखता है किला

करीब 400 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित मेहरानगढ़ किला कई किलोमीटर दूर से दिखाई देता है। बारिश के बाद जब मौसम साफ होता है, तब इसकी भव्यता और भी ज्यादा नजर आती है। पहले इस किले को मिहिरगढ़ कहा जाता था। ‘मिहिर’ का अर्थ सूर्य होता है। बाद में इसका नाम मेहरानगढ़ पड़ गया। इसकी बनावट मोर के पंख जैसी दिखाई देती है, इसलिए इसे मयूरध्वज दुर्ग भी कहा जाता है।

राव जोधा ने करवाया था निर्माण

मेहरानगढ़ किले का निर्माण वर्ष 1459 में राव जोधा ने करवाया था। इसी के साथ जोधपुर शहर की स्थापना भी हुई। यह किला देश के सबसे बड़े किलों में गिना जाता है। करीब पांच शताब्दियों तक यह राठौड़ वंश का मुख्य केंद्र रहा। राठौड़ वंश सूर्य को अपना आराध्य मानता था, इसलिए किले का नाम भी सूर्य से जुड़ा रखा गया।

दीवारें 12 से 17 फीट तक चौड़ी

किले की सुरक्षा व्यवस्था उस समय के हिसाब से बेहद मजबूत बनाई गई थी। इसकी दीवारें 12 से 17 फीट तक चौड़ी और 20 से 150 फीट तक ऊंची हैं। किले की लंबाई करीब 1500 फीट और चौड़ाई 750 फीट बताई जाती है। दुर्ग तक पहुंचने के लिए कई पोल और द्वार बनाए गए हैं। इनमें जयपोल, फतहपोल, लोहापोल, सूरजपोल, गोपालपोल और भैरूपोल प्रमुख हैं। इन रास्तों को घुमावदार और संकरा बनाया गया था ताकि दुश्मन आसानी से किले में प्रवेश नहीं कर सके।

गर्मियों में भी ठंडा रहता है महल

किले के अंदर बने महलों की खूबसूरती आज भी लोगों को आकर्षित करती है। महलों की दीवारों और छतों पर खास तरह का प्लास्टर किया गया था, जिसमें कौड़ी का पाउडर मिलाया जाता था। इसी वजह से सदियों बाद भी उनकी चमक बरकरार है। सफेद दीवारों और खुले आंगनों की वजह से महल गर्मियों में भी ठंडे रहते हैं। इतिहास में मेहरानगढ़ किले पर कई बार हमले हुए, लेकिन आज भी यह सीना तानकर खड़ा है। यही वजह है कि मेहरानगढ़ आज भी जोधपुर की आन, बान और शान माना जाता है।