जोधपुर के तनावड़ा में जैन मंदिर के पास खेत में बने कमरे में दो बच्चों को फांसी के फंदे पर लटका दम्पति ने भी फंदा लगा आत्महत्या कर ली।
जोधपुर. दिनोंदिन बढ़ती महंगाई और आर्थिक तंगी गरीब परिवारों पर कहर बन कर टूट रही है। गरीबी और बीमारी में ईलाज में लगने वाले खर्च ने गरीब जनता की कमर तोड़ रखी है। इसका परिणाम है कि आज जोधपुर के एक परिवार के चार सदस्यों को इस दंश से निजात पाने के लिए आत्महत्या करने जैसा कदम उठाना पड़ा है। यह सोचने वाली बात है कि जहां विकास की ढेरों बातें हो रही हैं और सुनहरे भविष्य के हसीन सपने दिखाए जा रहे हैं। वहां की हकीकत दिल दहला देने वाली है। जोधपुर में आज हुए एक हादसे ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या महंगा इलाज और आर्थिक तंगी से जूझने के बजाए मौत को गले लगा लेना ज्यादा आसान काम है?
जोधपुर के तनावड़ा में जैन मंदिर के पास खेत में बने कमरे में दो बच्चों को फांसी के फंदे पर लटका दम्पति ने भी फंदा लगा आत्महत्या कर ली। आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हुआ है लेकिन जानकारों का कहना है कि आर्थिक तंगी के चलते दम्पति ने यह कदम उठाया है। जानकारी के अनुसार लूणी थानांतर्गत भाखरी गांव निवासी करनाराम (४५) और उसकी पत्नी पुष्पा देवी (४०) यहां तनावड़ा में जैन मंदिर के पास एक खेत में बने कमरे में रह रहे थे। उनकी तीन संताने हैं। अज्ञात कारणों से पति व पत्नी सहित पुत्र व पुत्री ने फंदा लगा कर अपनी ईहलीला समाप्त कर दी। मृतकों का शव एम्स की मोर्चरी भिजवाया गया है।
आसपास रहने वालों ने बताया कि दम्पति जैन मंदिर के पास स्थित एक खेत में काम किया करते थे। वहीं दम्पति का एक पुत्र विक्रम कमरे में सोता हुआ मिला जो बच गया है। एक परिवार के चार सदस्यों द्वारा फांसी लगाकर जान देने से आसपास दशहत फैल गई। पुलिस कमिश्नर सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंच जांच शुरू की है। मामला बासनी थाने का बताया जा रहा है। हालांकि अभी आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल पाया है लेकिन आर्थिक तंगी और लंबे समय से उर्मिला की बीमारी प्रमुख कारण माने जा रहे है। फंदे पर लटके परिवार के चार सदस्यों को देख कर हर कोई सदमे में है।