
आरपी बोहरा/जोधपुर. राजस्थान के न्यायिक इतिहास में सम्भवतरू प्रदेश के सबसे पुराने पारिवारिक सम्पत्ति विवादो में से एक विवाद बुधवार को न्यायाधीश दिनेश मेहता की अदालत में लगातार कई घंटों की सुनवाई के बाद खत्म कर दिया गया। पारिवारिक सम्पत्ति को लेकर शुरू हुई यह कानूनी जंग गंगानगर के एक परिवार में 58 साल पहले शुरू हुई थी। जो विभिन्न न्यायालयों में होते हुए हाईकोर्ट पहुंची। जहां सूझबूझ के साथ हुई सुनवाई के बाद इसका अंत हो सका। इस कानूनी जंग के दौरान एक पक्ष की तीन पीढिय़ां परलोक पहुंच गईं और अदालत में चौथी पीढ़ी को न्याय सुलभ हुआ।
साल 1959 में कोर्ट पहुंचा था यह मामला
सबसे पहले यह मामला 1959 में गंगानगर के अपर जिला न्यायाधीश संख्या एक के समक्ष पेश किया गया था। इस मामले में पहली डिक्री सन् 1977 में हुई थी। जबकि अधीनस्थ न्यायालय ने साल 1987 में फैसला किया, लेकिन वर्ष 1988 में यह मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया। मामले की सुनवाई के दौरान एक पक्ष की तीन पीढि़यां भगवान को प्यारी हो चुकीं थीं। जब कहीं जा कर इस कानूनी जंग को विराम मिला है।
90 वर्षीय बंशीधर ने जीती जंग
मामले के पक्षकार 90 वर्षीय बंशीधर ने यह कानूनी जंग जीत ली। जो अब गांव में जगराता करवा कर ईश्वर का आभार प्रकट कर रहा है।
यह था मामला
दरअसल यह पूरा मामला गंगानगर निवासी स्वर्गीय सूरजमल की सम्पत्ति का है। सूरजमल ने दो विवाह किए थे और अपनी सम्पत्ति के बंटवारे में एक पत्नी के बच्चों को कुछ नहीं दिया। जिसके चलते इस विवाद का जन्म हुआ। वर्ष 1959 में गंगानगर अपर जिला न्यायाधीश संख्या एक के समक्ष मुकदमा नम्बर 32, 1959 सुनवाई के लिए पहली बार आया था। इसके बाद विभिन्न अदालतों में होता हुआ यह वर्ष 1988 में हाईकोर्ट पहुंचा। मुकदमा लगभग 19 बरसों तक जारी रहा। इस मुकदमे में मूल पक्षकार एक मात्र 90 वर्षीय बंशीधर जिंदा है। जिसने अपनी सौतेली मां के पोतों से 60 सालों के इंतजार के बाद कानूनी जंग जीत ली।