
जोधपुर . मंडोर वनक्षेत्र के बेरीगंगा वन खंड में दो साल पूर्व अवैध खनन करते पकड़े गए वाहनों और मौके पर जब्त करोड़ों के पत्थर की नीलामी करने में वनविभाग नाकाम साबित हुआ है। नतीजन सरकार को करोड़ों के राजस्व के नुकसान के साथ वनक्षेत्र में खनन माफिया को रोकने के लिए खींची गई लक्ष्मण रेखा भी धीरे-धीरे खत्म होने लगी है। दिनोंदिन वन भूमि में अतिक्रमण के मामले भी बढऩे लगे हैं। इससे वन विभाग की चिंता और बढ़ गई है।
मंडोर वनक्षेत्र में कई जगह लक्ष्मण रेखा को लांघ कर अवैध अतिक्रमण की बाढ़ सी आ गई है। बड़ी संख्या में मौके पर निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। इतने व्यापक स्तर पर खनन, अतिक्रमण एवं भवन निर्माण का होना स्टाफ की खुली मिलीभगत एवं कर्तव्य से लापरवाही द्योतक है। तत्कालीन सहायक वन संरक्षक ने मंडोर रेंज के वनखंड बेरीगंगा वन क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई कर वनक्षेत्र में अवैध खनन रोक कर मौके पर बड़े प्रस्तर, पत्थर की पट्टियां और बड़ी मात्रा में पत्थरों को राजकीय तहवील में लिया। जब्त सभी प्रस्तरों पर पेंट से फॉरेस्ट डिपार्टमेन्ट लिखकर नम्बरिंग मय नाप लिखकर एक सप्ताह में आगामी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन दो साल बीतने के बाद कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
तीन अधिकारी बदल चुके
बेरीगंगा वनक्षेत्र में अवैध खनन रोकथाम की कार्रवाई के बाद पिछले दो साल में तीन उपवन संरक्षक वन विभाग में बदल चुके है, लेकिन जब्त पत्थरों का मामला जस का तस है।
मूल्यांकन के बाद होगी नीलामी
पिछले एक साल से वनक्षेत्र में रास्ता खुला पड़ा है। जब्त किए पत्थर वनविभाग के कब्जे में है। हमने माइनिंग डिपार्टमेंट को मूल्यांकन करने के लिए पत्र प्रेषित किया है। माइनिंग अधिकारी पत्थरों का मूल्यांकन करने के बाद जब्त किए गए पत्थरों की निलामी का कार्रवाई शुरू की जाएगी।
हेमेन्द्र त्रिवेदी, क्षेत्रीय वन अधिकारी मंडोर।