जोधपुर

Rajasthan: ₹84 के दो मिर्चीबड़ों ने खोली नामी कारोबारी की GST गड़बड़ी, ऑनलाइन बिक्री छिपाकर ले रहा था फर्जी ITC

Jodhpur GST News: जोधपुर के एक नामी मिर्चीबड़ा कारोबारी की कथित जीएसटी गड़बड़ी का खुलासा महज ₹84 के दो मिर्चीबड़ों के ऑर्डर से हो गया। स्टेट जीएसटी विभाग की जांच में ऑनलाइन बिक्री को रिटर्न में छिपाकर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) लेने का मामला सामने आया है।
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May 30, 2026
Jodhpur Mirchibada Businessman
Photo: AI

GST Action Against Jodhpur Mirchi Bada Businessman: राजस्थान में जोधपुर शहर के नामी मिर्चीबड़ा व्यवसायी की दस्तावेजों में जीएसटी चोरी पकड़ी गई है। व्यवसायी ऑनलाइन फूड डिलिवरी से मिर्चीबड़े भेजने के बावजूद फर्जी तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) ले रहा था। स्टेट जीएसटी विभाग ने व्यवसायी को नोटिस जारी कर जून के प्रथम सप्ताह तक अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। स्टेट जीएसटी विभाग ने तीन दिन पहले शहर के नामी मिर्चीबड़ा व्यवसायी के यहां संदेह के आधार पर कार्रवाई की थी। इस कार्रवाई के लिए अधिकारियों को प्रायोगिक तरीका अपनाना पड़ा।

अफसरों ने कलक्ट्रेट स्थित अपने ऑफिस में जेब खर्च से दो मिर्चीबड़े के ऑर्डर दिए। यह ऑर्डर 84 रुपए का पड़ा और जांचा कि जोमैटाे या स्वेगी उनका ऑर्डर लेती है या नहीं। ऑर्डर रिसिव करके बिल बनते ही व्यवसायी राडार पर आ गया।

दरअसल मिर्चीबड़ा व्यवसायी अपने जीएसटी रिटर्न में ऑनलाइन फूड डिलिवरी कंपनियों के मार्फत सप्लाई को शून्य दर्शाता था। अफसरों का शक इससे गहरा गया। ऑनलाइन फूड डिलिवरी कंपनियां ग्राहकाें से सीधा जीएसटी लेती है और सरकार में जमा कराती है इसलिए वे आईटीसी क्लेम भी करती है। मिर्चीबड़ा व्यवसायी ने बगैर टैक्स जमा कराए फर्जी आइटीसी क्लेम करके सरकार को चूना लगा दिया। अब स्टेट जीएसटी विभाग उसकी आइटीसी और जुर्माने की गणना कर रहा है।

मिर्चीबड़ा, समोसा और कचोरी पर 5 प्रतिशत जीएसटी

मिर्चीबड़ा, समोसा, कचोरी जैसे खाद्य उत्पादों पर 5 प्रतिशत जीएसटी लागू है। काउंटर बिक्री में ग्राहकों से टैक्स वसूला जाता है, लेकिन अधिकांश दुकानों पर नियमित बिलिंग नहीं होने से वास्तविक बिक्री और खपत का सटीक रिकॉर्ड नहीं बन पाता। इसी वजह से विभाग समय-समय पर बिक्री और रिटर्न का मिलान करता है।

सरकार ने एक साल बाद अफसरों के हाथ खोले

राजस्थान सरकार ने करीब एक साल बाद स्थानीय स्तर पर जीएसटी सर्वे और छापों पर लगी रोक हटा दी है। अधिकारियों को ₹10 लाख से अधिक राजस्व हानि की आशंका वाले मामलों में सर्वे और कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्पष्ट किया है कि बिना ठोस आधार केवल व्यापारियों को परेशान करने के उद्देश्य से कार्रवाई नहीं की जाए। कर चोरी और फर्जी बिलिंग पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले एक साल से प्रदेशभर में मुख्य कार्रवाई जयपुर स्थित एंटी इवेजन विंग ही कर रही थी।

Updated on:
30 May 2026 07:22 am
Published on:
30 May 2026 07:22 am