सोशल प्राइड- शिविरों के माध्यम से बासनी के सुरेश लोगों को कर रहे जागरूक...
अकेले ही निकले थे हम, सफर की तलाश में..लोग जुटते गए, कारवां बनता गया...। कुछ ऐसी ही कहानी है बासनी क्षेत्र के रहने वाले सुरेश मेघवाल की। युवा जोश, चेहरे पर न मिटने वाली मुस्कराहट व दलित समाज में अपनी विशेष पहचान बनाने वाले इस युवा में रक्तदान के प्रति जुनून सर चढकर बोल रहा है। इसी कारण से वे हमेशा रक्तदान करने के लिए तत्पर रहते हैं।
अनजाने में हुई रक्तदान की शुरूआत बन गई आदत
रक्तदान की शुरूआत कैसे हुई बकौल सुरेश किसी परिचित के इलाज के लिए अहमदाबाद गए थे, वहां रक्त की आवश्यकता पडऩे पर कई जगह घूमे लेकिन कहीं पर भी रक्त नहीं मिला। ऐसे में रक्त का महत्व व आवश्यकता को देखते हुए रक्तदान करने का फैसला किया। हालांकि यह फैसला आसान नहीं था, पहली बार रक्तदान करने को लेकर मन मेें भय व घबराहट भी थी।
सुरेश बताया कि उसने कभी ये सोचा ही नहीं था कि मुझे यह करना पड़ेगा लेकिन रक्तदान करने के बाद सारी घबराहट व भय दूर हो गया। उस दिन रक्त का महत्व समझ आया उसी दिन ठान लिया था रक्त की कमी से किसी की भी जान न जाए। जिसके बाद रक्तदान करने के प्रति छाया नशा निंरतर जारी है।
अब तक क्षेत्र में करा चुके हैं 80 से ज्यादा रक्तदान शिविर
रक्त की महत्ती आवश्यता को देखते हुए अब तक करीब 80 रक्तदान शिविरों का आयोजन कर चुके हैं। जिसका उद्देश्य युवाओं को रक्तदान की महत्व को देखते हुए जागरूक करना है। साथ ही जरूरत पडऩे पर रक्त की आवश्यकता वाले लोगों को रक्त भी उपलब्ध करवाते हैं।
मिल चुके हैं कई सम्मान..
अपने सेवाभावी व मिलनसार स्वभाव व रक्तदान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए शहर की विभिन्न संस्थाओं व जिला प्रशासन व अन्य कई संगठनों से सैकड़ों सम्मान मिल चुके हैं। जिनमें वीर दुर्गादास राठौड़ अवॉर्ड, महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन सहित प्रशासनिक स्तर पर भी गंणतंत्र दिवस व अन्य मौकों पर इनको सम्मान से नवाजा जा चुका है।
रक्तदान का जीवन में अमूल्य महत्व है। रक्त की आवश्यकता किसी को भी पड़ सकती है। ऐसे में सभी को रक्तदान करना चाहिए। इसके माध्यम से किसी की जान बचाई जा सकती है। किसी भी असहाय व जरूरतमंद को इधर उधर न भटकना पड़े इस के लिए रक्तदान बहुत जरूरी है। युवाओं को बढ़ चढकर हिस्सा लेना चाहिए। - सुरेश मेघवाल, रक्तदाता