राजस्थान उच्च न्यायालय ने जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर राजश्री राणावत को निलम्बित करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। उच्च न्यायालय ने इस मामले में विश्वविद्यालय के कुलपति व कुलसचिव से जवाब तलब किया है। यह जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी की प्रो. मेनन के विवादित भाषण का मामला है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर राजश्री राणावत को निलम्बन आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।
निलम्बित कर दिया गया था
अंग्रेजी विभाग में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की प्रो. निवेदिता मेनन के कथित राष्ट्रविरोधी और विवादित भाषण को लेकर जेएनवीयू की सिंडिकेट में लिए गए निर्णय के आधार पर उन्हें निलम्बित कर दिया गया था।
निलम्बन को चुनौती दी थी
डॉ. राणावत को इस कॉन्फ्रेंस का आयोजक होने के नाते जिम्मेदार ठहराते हुए निलम्बित किया गया था। राणावत की ओर से अधिवक्ता कुलदीप माथुर ने रिट याचिका पेश करते हुए निलम्बन को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि प्रो. मेनन के भाषण की उन्हें पूर्व जानकारी नहीं दी। उनको आमंत्रित करने की विश्वविद्यालय को भी जानकारी थी।
पुलिस से सम्पर्क करने की सलाह दी थी
जांच कमेटी को उन्होंने सुरक्षा उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया था, ताकि वह अपना पक्ष कमेटी के समक्ष रख सके, लेकिन जांच कमेटी ने सुरक्षा उपलब्ध करवाने से इनकार करते हुए इसके लिए पुलिस से सम्पर्क करने की सलाह दी थी।
अपना पक्ष नहीं रख पाई
सुरक्षा नहीं मिलने के कारण वह अपना पक्ष नहीं रख पाई और विश्वविद्यालय ने उनको निलम्बित कर दिया। निलम्बन आदेश अविधिक है। प्रारम्भिक सुनवाई के बाद न्यायाधीश दिनेश मेहता ने राणावत के निलम्बन आदेश पर अंतरिम रोक लगाई और कुलपति व कुलसचिव को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए।