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लंबित सीमांकन प्रकरणों में मैहर कलेक्टर ने राजस्व अधिकारियों की लगाई क्लास

बोलीं मैहर कलेक्टर- बटांकन न होने की बात कहकर सीमांकन से मना करने की बहानेबाजी बंद करें तहसीलदार। बटांकन भी उनकी ही जिम्मा है। यह सब अब नहीं चलेगा। जनता के काम लौटने नहीं चाहिए।

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bidisha

मैहर। कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी ने राजस्व अधिकारियों की बैठक में लंबित राजस्व मामलों को लेकर गहरी नाराजगी जाहिर की। कहा, यहां देखने में आ रहा है कि शामिल खाते के सीमांकन के प्रकरणों में यह कहते हुए सीमांकन से इंकार कर दिया जाता है कि इसका बटांकन नहीं है। जबकि बटांकन की जिम्मेदारी भी राजस्व विभाग की है। लिहाजा अब कोई भी अधिकारी इस तरह के मामले में सीमांकन से इंकार नहीं करेगा। इसी तरह सीएम हेल्पलाइन में ऐसे सीमांकन के प्रकरण इस बहाने से क्लोज नहीं किए जाएंगे। बैठक में अपर कलेक्टर संजना जैन, एसडीएम दिव्या पटेल, डॉ आरती सिंह, एसपी मिश्रा सहित तहसीलदार और नायब तहसीलदार मौजूद रहे।

कलेक्टर ने कहा कि सीमांकन के काफी संख्या में प्रकरण लंबित दिख रहे हैं। लगभग 350 प्रकरण लंबित है। अभी सही समय है। खेतों की फसल कट चुकी है। ऐसे में दो माह में सभी लंबित सीमांकन के प्रकरणों का निराकरण कर दिया जाए। इसमें किसी तरह की बहानेबाजी नहीं चलेगी। सीएम हेल्पलाइन में निराकरण की गति बढ़ाएं। एल3 और एल4 के लंबित प्रकरण नहीं दिखने चाहिए। सभी अधिकारी अपने स्तर पर निराकरण समय पर करें। कोई भी शिकायत कलेक्टर लेबल तक नहीं पहुंचनी चाहिए, जो उनके स्तर पर निराकृत होने योग्य है।

तो अब अधिकारियों पर लगेगा जुर्माना

कलेक्टर ने कहा कि लोक सेवा केन्द्र से आने वाले सभी प्रकरणों का निराकरण समय सीमा में होना चाहिए। मसलन नामांतरण 45 दिन में हो जाए। अन्य प्रकरण भी तय समय सीमा में हो जाएं। जो भी प्रकरण समय बाह्य होगा, संबंधित अधिकारी पर अब प्रकरणवार 250 रुपए का जुर्माना लगाकर उनके वेतन से काटा जाएगा।

कमजोर वसूली पर नाराजगी

राजस्व वसूली की समीक्षा में पाया कि गत वित्तीय वर्ष में राजस्व वसूली काफी कम रही है। महज 40 फीसदी वसूली हो सकी है। इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इस वर्ष अभी से टारगेट के अनुसार वसूली प्रारंभ कर दें। जिसकी वसूली टारगेट अनुसार नहीं हुई, उसपर कार्यवाही की जाएगी। गेहूं उपार्जन केन्द्रों का समय समय पर निरीक्षण करने कहा।

तालाबों में लगाएं साइन बोर्ड

कलेक्टर ने कहा कि अमृत सरोवर और बडी जल संरचनाओं को खसरे में इन्द्राज करे। सभी तालाबों का परीक्षण कर साइन बोर्ड लगाये। तालाब में आवश्यक सावधानी बरतने के लिए स्थानीय लोगों को एडवाइजरी भी जारी करें।