
पूर्णिमा बोहरा/जोधपुर. कचरा संग्रहण की पहली हाईटेक योजना अनदेखी की शिकार होती नजर आ रही है। नगर निगम की ओर से शहर में लगाए जाने वाले हाईटेक बिन इन दिनों सड़क किनारे पड़े धूल फांक रहे हैं। जीएसएम सिम से जुड़े यह बिन राज्य भर में पहली बार जोधपुर में लगाए जाएंगे, बावजूद इसके इस योजना में देरी के साथ ही लापरवाही भी बरती जा रही है। योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए ठेका फर्म को पांच माह का समय दिया गया था, लेकिन सात माह बीतने के बावजूद स्थिति यथावत है। शहर में पिछले माह डस्टबिन तो आ गए, लेकिन उनको शताब्दी सर्कल के पास सड़क किनारे ही रख दिया गया। ठेका फर्म की लापरवाही के चलते निगम की इस योजना का लाभ आमजन को समय पर नहीं मिल पा रहा। इधर, निगम भी समय पर योजना पूरी करने में गंभीरता नहीं दिखा रहा है।
नवम्बर में हुआ था भूमि पूजन
योजना के तहत अंडरग्राउंड डस्टबिन के लिए स्थानों का चयन कर 16 नवम्बर को भूमि पूजन किया गया था। भूमि पूजन के बाद डस्टबिन आधे जमीन में रहे, इसके लिए होद बनवाए गए। पक्का निर्माण होने के बावजूद भी इन बिन का इंस्टोलेशन नहीं हुआ, जबकि कम्पनी की टीम इस योजना की देखरेख व कार्य कर रही है। बावजूद इसके योजना समय पर पूरी नहीं हुई।
करोड़ों की योजना
स्मार्ट डस्टबिन की योजना करीब पांच करोड़ की है। प्रत्येक डस्टबिन की लागत 7 लाख रुपए है। 20 डस्टबिन जोधपुर में आ चुके हैं। ऐसे में 14 लाख का माल सड़क पर पड़ा है। इन डस्टबिन में ढाई टन कचरा एक साथ भरने की क्षमता है। इसके भरते ही मैसेज उसमें लगी सिम के माध्यम से संबधित अधिकारी के मोबाइल पर चला जाएगा। मैसेज आते ही गाड़ी वहां पहुंचकर बिन खाली कर देगी। जीएसएम सिम लगे इन डस्टबिन की स्टील से निर्मित कंटेनर वाला हिस्सा भूमिगत होगा और आधा हिस्सा बाहर होगा। डस्टबिन के बाहरी हिस्से से कचरा डाला जाएगा।