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जोधपुर: 1984 में चंदे से बने अस्पताल पर क्यों लगा ताला? जानिए कैसे नगरपालिका कार्यालय के काम आ सकती है इमारत

जोधपुर के तिंवरी में साल 1984 में ग्रामीणों और दानदाताओं के सहयोग से बना पुराना सरकारी अस्पताल भवन अब उपयोगहीन होकर जर्जर हो रहा है। अस्पताल नए भवन में शिफ्ट होने के बाद पुरानी इमारत पर ताला लगा है। देखरेख के अभाव में छतों से प्लास्टर गिर रहा है।
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जोधपुर

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Arvind Rao

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सत्येंद्र सिंह राजपुरोहित

Aug 11, 2026

hospital built with public funds lies locked in tiwari

तिंवरी में जनसहयोग से बने पुराने सरकारी अस्पताल का भवन (पत्रिका फोटो)

-सत्येंद्र सिंह राजपुरोहित

तिंवरी (जोधपुर): करीब चार दशक पहले ग्रामीणों और क्षेत्र के दानदाताओं के सहयोग से तैयार कराया गया तिंवरी का पुराना सरकारी अस्पताल भवन आज उपयोगविहीन होकर जर्जर होने की ओर बढ़ रहा है। अस्पताल के नवीन भवन में स्थानांतरण के बाद पुरानी इमारत पर ताला लगा है। रखरखाव के अभाव में छतों से प्लास्टर गिरने लगा है। दूसरी ओर तिंवरी नगरपालिका सीमित जगह वाले पुराने पंचायत भवन में अपना कार्यालय संचालित कर रही है। ऐसे में स्थायी नगरपालिका भवन बनने तक पुराने अस्पताल भवन की मरम्मत कर उसे अस्थायी नगरपालिका कार्यालय के रूप में उपयोग में लेने का विकल्प सामने आया है।

गांव के सहयोग से 1984 में खड़ा हुआ था भवन

वर्ष 1984 में ग्राम विकास समिति की देखरेख में ग्रामीणों और क्षेत्र के दानदाताओं के सहयोग से अस्पताल भवन का निर्माण कराया गया था। तत्कालीन ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष तख्त सिंह राजपुरोहित, मंत्री मोहनलाल, कोषाध्यक्ष रामेश्वर राठी तथा तत्कालीन सरपंच प्रेमचंद खत्री की देखरेख में जनसहयोग से यह भवन तैयार हुआ था। करीब चार दशक तक इस भवन में क्षेत्र के लोगों को चिकित्सा सुविधाएं मिलती रहीं। ऐसे में यह इमारत महज सरकारी संपत्ति नहीं, बल्कि तिंवरी के लोगों के सामूहिक सहयोग और सेवा भावना की धरोहर भी है।

नया अस्पताल बना तो पुरानी इमारत हुई वीरान

करीब एक माह पहले सरकारी अस्पताल को नवीन भवन में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद पुराना अस्पताल भवन खाली पड़ा है। भवन में 10 से अधिक कमरे और चार बड़े हॉल हैं। परिसर में पर्याप्त खुला स्थान होने के साथ पार्किंग के लिए भी जगह उपलब्ध है। नियमित उपयोग और देखरेख नहीं होने से भवन की स्थिति खराब होने लगी है और छतों से प्लास्टर गिर रहा है। समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो भवन को और नुकसान पहुंचने की आशंका है।

एक हॉल में सिमटा पालिका का कामकाज

वर्तमान में नगरपालिका का कार्यालय पुराने पंचायत भवन में सीमित जगह में चल रहा है। एक ही हॉल में अस्थायी पार्टीशन कर अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए छोटे-छोटे चेंबर बनाए गए है। अलग-अलग शाखाओं के लिए पर्याप्त कमरे नहीं है। बोर्ड बैठकों और बड़ी बैठकों के लिए अलग हॉल का अभाव है। पार्षदों के बैठने, आमजन के लिए पर्याप्त स्थान और पार्किंग जैसी सुविधाएं भी सीमित है।

पहला निर्वाचित बोर्ड, बढ़ेंगी कार्यालय की जरूरतें

आगामी नगरपालिका चुनाव के बाद तिंवरी नगरपालिका का पहला निर्वाचित बोर्ड गठित होगा। इसके बाद अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी के अलग चेंबर, पार्षदों के बैठने की व्यवस्था, बोर्ड बैठकों के लिए बड़ा हॉल और कर्मचारियों के लिए अलग-अलग कक्ष की जरूरत होगी। साथ ही रिकॉर्ड, फर्नीचर, उपकरण और अन्य संसाधनों के लिए भी पर्याप्त स्थान चाहिए होगा। पुराने अस्पताल भवन के कमरे और हॉल इन जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। बड़े हॉल में बोर्ड बैठक और अन्य कार्यक्रम तथा कमरों में विभिन्न शाखाएं, रिकॉर्ड और उपकरण रखे जा सकते हैं।