राजस्थान के जोधपुर जिले में देश के पहले 'पंचगव्य चिकित्सा पाठ्यक्रम' (Panchgavya Therapy Course) का ऐतिहासिक शुभारंभ किया गया है।
राजस्थान की पावन धरा पर सोमवार, 4 मई 2026 को एक नया इतिहास रचा गया। मुख्यमंत्री भजनलाल सरकार की 'गौ-सेवा' की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए जोधपुर जिले के मोकलावास में देश के प्रथम पंचगव्य चिकित्सा पाठ्यक्रम का शुभारंभ हुआ है। पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने गौ संवर्द्धन आश्रम में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान इसकी पहली कक्षा का उद्घाटन किया। यह केवल एक कोर्स नहीं, बल्कि प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के मिलन का एक बड़ा केंद्र बनने जा रहा है।
देश में पहली बार किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय के तत्वावधान में पंचगव्य (दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर) पर आधारित चिकित्सा पद्धति को आधिकारिक पाठ्यक्रम का रूप दिया गया है।
मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा कि यह पाठ्यक्रम ग्रामीण विकास और युवाओं के लिए वरदान साबित होगा।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री कुमावत ने गौ संवर्द्धन आश्रम का गहन अवलोकन किया। वे आश्रम में तीन पीढ़ियों वाली गायों और स्वस्थ नंदी को देखकर गदगद हो उठे।
इस ऐतिहासिक पल के गवाह पाली के पूर्व सांसद पुष्प जैन, आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति वैद्य गोविंद शुक्ला सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य नागरिक बने।
आज जब पूरी दुनिया 'बैक टू नेचर' की बात कर रही है, तब राजस्थान की यह पहल वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि पंचगव्य चिकित्सा से कई ऐसी बीमारियों का इलाज संभव है जहाँ एलोपैथी भी सीमित हो जाती है। क्या यह पाठ्यक्रम राजस्थान को 'मेडिकल टूरिज्म' का नया हब बनाएगा? क्या अब विदेशी छात्र भी जोधपुर की धरती पर गायों से जुड़ी चिकित्सा पद्धति सीखने आएंगे? यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन शुरुआत 'धमाकेदार' हुई है।