
प्रतीकात्मक तस्वीर -पत्रिका
जोधपुर। राजस्थान में इलाज के क्षेत्र से बड़ी और सुकून देने वाली खबर आई है। एम्स जोधपुर के डॉक्टरों ने पहली बार बिना ओपन सर्जरी के 10 गुणा 10 सेमी का जटिल रेक्टल ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाल दिया। आमतौर पर इतने बड़े ट्यूमर के लिए पेट की बड़ी सर्जरी करनी पड़ती है, लेकिन यहां पूरी प्रक्रिया एंडोस्कोपी से ही पूरी कर ली गई।
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग की टीम ने करीब आठ घंटे तक बेहद बारीकी और धैर्य के साथ यह जटिल प्रक्रिया की। यह ट्यूमर ‘लेटरली स्प्रेडिंग ट्यूमर’ (एनएसटी) था, जो रेक्टम की दीवार के बड़े हिस्से में फैला हुआ था। ऐसे मामलों में ऑपरेशन के दौरान अंग को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है, लेकिन इस तकनीक से अंग पूरी तरह सुरक्षित रहा।
डॉक्टरों ने एंडोस्कोपिक सबम्यूकोसल डिसेक्शन (ईएसडी) तकनीक का इस्तेमाल किया, जो बेहद एडवांस और कम कट-छांट वाली प्रक्रिया मानी जाती है। इससे न सिर्फ बड़ा ऑपरेशन टल गया, बल्कि मरीज को कम दर्द, कम जटिलताएं और जल्दी रिकवरी का फायदा मिला।
इलाज के बाद मरीज की हालत स्थिर रही और उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आशीष अग्रवाल के मुताबिक, यह उपलब्धि बताती है कि अब जोधपुर में भी जटिल गैस्ट्रो इलाज विश्वस्तरीय स्तर पर संभव है।
यह एक एडवांस एंडोस्कोपिक तकनीक है, जिसमें बिना बड़ा चीरा लगाए शरीर के अंदर से ही ट्यूमर को परत-दर-परत हटाया जाता है। इसमें ब्लीडिंग और इंफेक्शन का खतरा कम होता है और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है। इस प्रक्रिया में पेट नहीं काटना पड़ा, अंग सुरक्षित रहा और दर्द भी कम हुआ। अस्पताल में रहने का समय घटा और रिकवरी तेजी से हुई, जिससे मरीज जल्द घर लौट सका।
Updated on:
02 May 2026 11:57 am
Published on:
02 May 2026 11:57 am
