बीमा क्लेम और समर्थन मूल्य पर पूरी फ सल की खरीद से होना पड़ रहा वंचित
अमित दवे/जोधपुर. सांख्यिकी विभाग की ओर से वास्तविक आंकड़ें जुटाने में प्रशासनिक तंत्र विफल साबित हुआ है। इसका नमूना वर्तमान में समर्थन मूल्य पर खरीद के दौरान सामने आया। राजस्व विभाग की ओर से कृषि क्षेत्र में बुआई व उत्पादन का पटवारियों की ओर से आकलन के बाद सांख्यिकी विभाग प्रदेश में कृषि उत्पादन के आंकड़े जारी करता है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर फसल बीमा के क्लेम का निर्धारण व समर्थन मूल्य पर खरीद की जाती है। आंकड़ों में गफलत की वजह से प्रदेश के किसानों को न तो बीमा क्लेम का लाभ मिल रहा है और न ही समर्थन मूल्य पर पूरी फसल की खरीद हो रही है।
इस वजह से बीमा क्लेम से वंचित किसी प्रकार की आपदा व फ सलों में नुकसान की स्थिति नहीं होने पर सिंचित क्षेत्र में चने का सामान्य उत्पादन 20 क्विं प्रति हैक्टेयर व रायड़ा का 22 क्विं प्रति हैक्टेयर होता है। सही तरीके से आंकड़ों का आकलन नहीं होने से रायड़ा 6.21 से 12.69 क्विं प्रति हैक्टेयर औसत उपज मानकर फ सल बीमा क्लेम का निर्धारण किया जा रहा है। इससे करोड़ों का प्रीमियम भुगतान करने व रोग किट प्रकोप, पाला लगने सहित विभिन्न कारणों से 50 प्रतिशत से भी अधिक फ सल उत्पादन कम होने पर भी इन गलत आंकड़ों को आधार मानने के कारण किसानों को बीमा क्लेम नही मिला पाता है।
आर्थिक नुकसान उठा रहे किसान
वास्तविक उत्पादन को नजरअंदाज कर बिना आकलन के फ सल उत्पादन को औसत उपज के आसपास माना जा रहा है। प्रति हैक्टेयर उपज के निर्धारण के आंकड़ों का संधारण किए जाने से किसानों की समर्थन मूल्य पर फ सल खरीद भी 11.72 क्विंटल सरसों व 9.42 क्विंटल चने की प्रति हैक्टेयर की जा रही है। जिन किसानों की फ सलें किसी कारण से प्रभावित हुई है, उन्हें बीमा क्लेम से वंचित रहना पड़ रहा है। जिन किसानों के सामान्य उत्पादन हुआ है उनको समर्थन मूल्य पर पूरी फ सल बेचने पर नुकसान उठाना पड़ रहा है।
खमियाजा भुगत रहे किसान
उत्पादन का सही आकलन नहीं होने से नीतियां गलत तरीके से बनती हैं। पर्याप्त संख्या में कृषि पर्यवेक्षक की नियुक्ति कर फसल कटाई के सही सर्वे व नई तकनीकों के माध्यम से वास्तविक फ सल उत्पादन के आंकड़ों का संधारण होने पर ही सभी किसानों को उनके हक अनुसार फ सल बीमा व समर्थन मूल्य खरीद का वास्तविक लाभ मिल सकेगा।
नरेश व्यास, जिलाध्यक्ष, भारतीय किसान संघ, जोधपुर