- विवि ने कुलपति को अंधेरे में रख प्रेस नोट जारी किया
जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय की छात्रसंघ अध्यक्ष कांता ग्वाला को विवि की ओर से उपलब्ध करवाए गए 14 कर्मचारियों की सोमवार को कार्यवाहक कुलपति डॉ. राधेश्याम शर्मा ने समीक्षा की। कुलपति ने पूर्व छात्रसंघ अध्यक्षों की फाइलें मंगवाकर देखी। वर्ष 2015 से पहले विवि के सभी छात्रसंघ अध्यक्षों के पास दो से चार कर्मचारी ही उपलब्ध थे। इस मामले में कुलपति एक दो दिन में रजिस्ट्रार व वित्तीय सलाहकार के साथ मिलकर निर्णय करेंगे। विवि ने एक अक्टूबर 2017 से ग्वाला व उनके कार्यालय के लिए छह सिक्योरिटी गार्ड, दो चपरासी, दो उच्च कुशल कर्मचारी, दो कुशल कर्मचारी व दो लिपिक सहित 14 कर्मचारी लगा रखे हैं। हर महीने इन पर एक लाख रुपए खर्च हो रहे हैं। छात्रसंघ अध्यक्ष का कार्यकाल 30 जून को समाप्त हो रहा है। विवि के पूर्व कुलपति डॉ. रामपाल सिंह के निर्देश पर विवि की स्थापना शाखा के सहायक रजिस्ट्रार ने आदेश जारी कर ये कर्मचारी लगाए थे।
छात्रों ने की कार्रवाई की मांग
विवि ने कुछ छात्र नेताओं ने सोमवार शाम को कुलपति डॉ. शर्मा से मुलाकात कर छात्रसंघ अध्यक्ष को उपलब्ध करवाए गए 14 कर्मचारियों के मामले की जांच की मांग की। छात्रों ने कुलपति से यह करार रद्द करने, नियम विरुद्ध आदेश जारी करने वाले विवि के कार्मिकों के विरुद्ध कार्रवाई करने और 14 कर्मचारियों के विरुद्ध अब तक हुए भुगतान की वसूली करने की मांग की।
अंधेरे में प्रेस नोट जारी
देर शाम विवि के जनसम्पर्क अधिकारी रामनिवास ग्वाला ने कुलसचिव के हवाले से एक प्रेस नोट जारी कर 14 कर्मचारियों की नियुक्ति को जायज ठहराया। प्रेसनोट में लिखा था- 'विवि छात्रसंघ को नियमानुसार कर्मचारी उपलब्ध करवाए गए हैं।' यह प्रेस नोट केवल चार पंक्तियों का है। इसमें किस नियम के तहत विवि ने छात्रसंघ को 14 कर्मचारी दिए, इसकी जानकारी नहीं है।
गौरतलब है कि राजस्थान के सभी विवि में लिंगदोह कमेटी के दिशा निर्देशाुनसार छात्रसंघ चुनाव होते हैं, जबकि प्रदेश के किसी भी विवि में छात्रसंघ अध्यक्ष को इतने कर्मचारी नहीं मिले हैं। यहां तक कि खुद विवि के कार्यवाहक कुलपति डॉ. राधेश्याम शर्मा ने अपने विवि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन आयुर्वेद विवि के छात्रसंघ अध्यक्ष को एक भी कर्मचारी नहीं दिया है।
इनका कहना है
मैंने छात्रसंघ अध्यक्ष को उपलब्ध करवाए गए कर्मचारियों की फाइल देखी है। इस मामले में रजिस्ट्रार व वित्तीय सलाहकार से वार्ता करने के बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचा जाएगा।
डॉ. राधेश्याम शर्मा, कार्यवाहक कुलपति, जेएनवीयू, जोधपुर