
आइआइटी जोधपुर की द्वारा बनाया गया उपकरण जिससे यह शोध हो रहा है।
जोधपुर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर के वैज्ञानिकों ने स्मार्ट ‘थेरानोस्टिक’ प्लेटफॉर्म विकसित किया हैं, जो एक साथ रोगों के निदान और उपचार का समाधान प्रदान करते हैं। यह तकनीक सटीक स्वास्थ्य सेवा ( प्रिसिजन मेडिसिन ) की दिशा में अहम मील का पत्थर मानी जा रही है।
इस शोध का नेतृत्व बायोसाइंस एवं बायो इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रविराज वंकायाला कर रहे हैं। उनकी टीम नैनो प्रौद्योगिकी के जरिए कैंसर और अन्य जटिल बीमारियों के इलाज के नए तरीके विकसित कर रही है।
थेरानोस्टिक्स एक ऐसी अवधारणा है, जिसमें निदान और उपचार को एकीकृत कर इलाज को अधिक सटीक और प्रभावी बनाया जाता है। आइआइटी जोधपुर की नैनोमेड लैब में विकसित अल्ट्रा-स्मॉल नैनोमैटेरियल्स शरीर में सीधे रोगग्रस्त कोशिकाओं तक पहुंचते हैं।
शोध में एम-जेनेस, मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क्स, ब्लैक फॉस्फोरस और बोरोफीन जैसे उन्नत द्वि-आयामी पदार्थों का उपयोग किया जा रहा है। ये सूक्ष्म कण दवा को लक्षित स्थान तक पहुंचाने के साथ-साथ बीमारी की पहचान भी करते हैं।
शोधकर्ता बायोमिमेटिक नैनो-कैरियर्स भी विकसित कर रहे हैं, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को पार कर सीधे प्रभावित हिस्से तक दवा पहुंचाते हैं। इससे इलाज की प्रभावशीलता बढ़ती है और दुष्प्रभाव कम होते हैं।
इस शोध की खासियत है, जिसमें निकट-अवरक्त प्रकाश की मदद से कैंसर कोशिकाओं को सटीक और कम आक्रामक तरीके से नष्ट किया जा सकता है। यह तकनीक एक साथ निदान, उपचार और निगरानी को संभव बनाती है।
तकनीक की सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए उन्नत सेलुलर मॉडल्स पर परीक्षण किए जा रहे हैं। डॉ. वंकायाला के अनुसार, यह तकनीक भविष्य में व्यक्तिगत चिकित्सा प्रणाली को बढ़ावा देगी, जिससे मरीजों को अधिक प्रभावी और किफायती इलाज मिल सकेगा।
Published on:
24 Apr 2026 01:04 pm
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