बाजरी, जीरा, मूंग, मोठ, तिल की किस्मों के संरक्षण की परियोजना
अमित दवे/जोधपुर. राजस्थान की कितनी ही फसलें ऐसी हैं जिन्हें अब वर्तमान समय में संरक्षण की दरकार है। लगातार उपेक्षा के शिकार हो रही इन विभिन्न किस्मों को नए जीवनदान की कब से आस थी। आखिरकार ये आस अब जल्द ही पूरी होने वाली है। इससे न सिर्फ इन फसलों का संरक्षण होगा बल्कि किसानों को भी खासा फायदा मिलेगा। बाजरी, जीरा, मूंग, मोठ, तिल व स्थानीय स्तर की फसलों की लुप्त होती किस्में अब कृषि विश्वविद्यालय संरक्षित करेगा। मण्डोर स्थित जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय को स्थानीय फसलों की लुप्त हो रही किस्मों के संरक्षण व शोध कार्य के लिए रोम स्थित इंटरनेशनल बायोडायवर्सिटी बोर्ड व ग्लोबल एनवॉयरमेंट फेसिलिटी (जेफ) की ओर से यह प्रोजेक्ट मिला है। प्रदेश में संचालित 5 कृषि विश्वविद्यालयों में से अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट हासिल करने वाला यह प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है।
राजस्थान के तीन जिले शामिल
प्रोजेक्ट में जोधपुर, बाड़मेर व जैसलमेर शामिल किए गए हैं। विवि जोधपुर जिले के ओसियां के गोविंदपुरा व मानसागर और बाड़मेर के चौहटन के धीरासर व धोख गांव में कार्य करेगा। इसके अलावा जोधपुर काजरी जैसलमेर जिले में कार्य करेगी।
डेढ़ करोड़ का फण्ड
पांच वर्षीय प्रोजेक्ट के लिए विवि को करीब डेढ़ करोड़ का फंड मिलेगा । विवि चयनित जिलों में बाजरी, जीरा, मूंग, मोठ, तिल, अश्वगंधा, मैथी, मेहंदी व अन्य स्थानीय फसलों के संरक्षण, उनकी नई वैरायटी पर शोध करेगा और किसानों को उच्च तकनीक इस्तेमाल करने के बारे में जानकारी देगा। साथ ही बीज भण्डारण के लिए सामुदायिक उन्नत बीज बैंक की व्यवस्था की जाएगी। इस प्रोजेक्ट में करीब 1600 किसानों को लाभान्वित करने की योजना है।
इनका कहना है
इंटरनेशनल बायोडायवर्सिटी बोर्ड व जेफ से फण्ड मिलने के बाद परियोजना पर काम शुरू हो गया है। अंतरराष्ट्रीय कृषि विशेषज्ञ समय-समय पर वर्कशॉप्स आयोजित कर विवि के वैज्ञानिकों को तकनीक का हस्तांतरण करेंगे। विवि के वैज्ञानिक यह जानकारी किसानों को देंगे।
-डॉ. बलराजसिंह, कुलपति, जोधपुर कृषि विवि