
Rajasthan Jodhpur News: जोधपुर के एक निजी अस्पताल में चिकित्सा लापरवाही का एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे चिकित्सा महकमे की संवेदनशीलता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फलोदी जिले के कलाऊ (कलावा) गांव निवासी संतोष पुरी की अस्पताल में इलाज के दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। कृषि कार्य के दौरान उंगली में लगी मामूली चोट का इलाज कराने आए स्वस्थ व्यक्ति की अचानक मौत ने अस्पताल प्रशासन को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है।
बता दें कि मृतक संतोष पुरी फलोदी में खेती-किसानी करते थे। खेत में काम करते समय उनकी उंगली में चोट लग गई थी, जिसके बेहतर इलाज के लिए वे जोधपुर के हॉस्पिटल आए थे। संतोष पुरी की शारीरिक स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वे फलोदी से जोधपुर तक का लगभग 120 किलोमीटर का सफर खुद अपनी मर्जी से तय करके आए थे।
मृतक के भतीजे राहुल ने बताया, बड़े पापा पूरी तरह स्वस्थ थे। उन्होंने खुद लगभग 50 किलोमीटर तक बिना किसी परेशानी के मोटरसाइकिल चलाई। हम उन्हें बाइक पर बैठाकर सामान्य स्थिति में अस्पताल लेकर आए थे। अस्पताल पहुंचने के बाद संतोष पुरी खुद चलकर काउंटर पर गए, रजिस्ट्रेशन कराया और डॉक्टरों से परामर्श लिया। उन्होंने खुद खड़े रहकर बिना किसी सहारे के एक्स-रे करवाया और ब्लड टेस्ट के लिए सैंपल दिए।
शुरुआती जांच और एक्स-रे रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टरों ने परिजनों को आश्वस्त किया कि घबराने की कोई बात नहीं है। यह एक बेहद 'नॉर्मल' केस है और उंगली को ठीक करने के लिए एक छोटा सा ऑपरेशन करना पड़ेगा, जिसका अनुमानित खर्च करीब 10,000 से 12,000 रुपए बताया गया। परिजनों ने बिना देरी किए ऑपरेशन के लिए अपनी सहमति दे दी।
सहमति मिलने के बाद स्टॉफ ने संतोष पुरी को ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट कर दिया। इसी दौरान डॉक्टरों ने भतीजे राहुल को बाजार से कुछ आवश्यक दवाइयां और इंजेक्शन लाने के लिए पर्चा थमा दिया। राहुल जब तक मेडिकल स्टोर से सामान लेकर वापस आए, संतोष पुरी को अंदर ले जाया जा चुका था।
परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन थिएटर में मरीज को एक इंजेक्शन लगाया गया, जिसके चंद मिनटों के भीतर ही उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। राहुल ने बताया कि महज 15 से 20 मिनट के भीतर उनके पास स्टॉफ का फोन आया कि मरीज की स्थिति सीरियस हो गई है और इसके तुरंत बाद डॉक्टरों ने उन्हें मौत की खबर दे दी।
संतोष पुरी के बेटे स्वरूप पुरी ने अस्पताल प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, जो व्यक्ति खुद बाइक चलाकर अस्पताल आया हो, उसकी केवल उंगली की चोट के कारण 20 मिनट में मौत कैसे हो सकती है? परिजनों को संदेह है कि बिना किसी सीनियर डॉक्टर की निगरानी के कोई गलत इंजेक्शन लगा दिया गया या फिर एनेस्थीसिया का ओवरडोज दे दिया गया।
डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने न तो कोई ऑपरेशन किया और न ही कोई इंजेक्शन लगाया। इस पर परिजनों का तर्क है कि अगर कोई प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई थी, तो मरीज को 20 मिनट तक अंदर क्यों रखा गया और अचानक आईसीयू में शिफ्ट करने की नौबत क्यों आई?
मौत के बाद जब परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से ऑपरेशन थिएटर के बाहर और परिसर की सीसीटीवी फुटेज दिखाने की मांग की, तो प्रबंधन ने साफ इनकार कर दिया। परिजनों का आरोप है कि लापरवाही छिपाने के लिए कैमरों के साथ छेड़छाड़ की गई है। स्वरूप पुरी ने कहा कि अस्पताल कर्मियों ने बहाना बनाया कि कैमरे सिर्फ लाइव दिख रहे हैं, रिकॉर्डिंग नहीं हो रही है। परिजनों को अंदेशा है कि रात में ही सीसीटीवी का डीवीआर बदल दिया गया है।
घटना की जानकारी मिलते ही कलाऊ गांव और गोस्वामी समाज के सैकड़ों लोग अस्पताल पहुंच गए और मुख्य गेट के बाहर धरना शुरू कर दिया। परिजनों का आरोप है कि सुबह 9 बजे लिखित शिकायत देने के बाद भी पुलिस का रवैया निराशाजनक रहा। पीड़ित परिवार की मुख्य मांगें हैं कि दोषी डॉक्टरों और स्टॉफ के खिलाफ मेडिकल नेग्लिजेंस के बजाय हत्या का मामला दर्ज कर तुरंत गिरफ्तारी हो।
अस्पताल के जिन सीसीटीवी कैमरों को 'नॉन-रिकॉर्डिंग' बताया जा रहा है, उनके डीवीआर की निष्पक्ष तकनीकी व फॉरेंसिक जांच की जाए। शव का पोस्टमार्टम निष्पक्ष डॉक्टरों के 'मेडिकल बोर्ड' से करवाकर पूरी वीडियोग्राफी कराई जाए, ताकि मौत के असली कारणों का खुलासा हो सके।