
भोपालगढ़ निवासी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती में चयनित पिता व पुत्र। Photo- Patrika
भोपालगढ़। कहते हैं कि सच्ची लगन, कड़ी मेहनत और कभी हार नहीं मानने का जज़्बा सफलता की मंजिल तक पहुंचा ही देता है। इसमें आर्थिक अभाव और कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इरादों के आगे टिक नहीं पाई। इसका उदाहरण भोपालगढ़ कस्बे के रामेश्वर बावरी और उनके पुत्र मनीष बावरी ने पेश किया है। जिन्होंने राज्य सरकार की ओर से हाल ही में पूरी हुई चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2025 के अंतिम परिणाम में पिता-पुत्र दोनों का एक साथ चयन हुआ है। एक ही भर्ती में दोनों के चयन की खबर से परिवार ही नहीं, पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
राज्य सरकार की ओर से हाल ही में घोषित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2025 के अंतिम परिणाम में भोपालगढ़ निवासी रामेश्वर बावरी और उनके पुत्र मनीष बावरी का एक साथ चयन हुआ है। एक ही भर्ती में पिता और पुत्र दोनों का सरकारी नौकरी के लिए चयन होना न केवल दुर्लभ उपलब्धि है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय भी बन गया है। रामेश्वर बावरी का जीवन संघर्षों से भरा रहा।
आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए पत्थर तोड़ने जैसा कठिन श्रम किया। दिनभर मजदूरी करने के बाद भी उन्होंने अपने बच्चों को पढ़ाने-लिखाने में कोई कमी नहीं आने दी। दूसरी ओर, पुत्र मनीष बावरी ने भी पिता के संघर्ष को अपनी प्रेरणा बनाया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने लगातार मेहनत की और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा। पिता और पुत्र दोनों ने एक साथ सरकारी नौकरी हासिल कर परिवार का सपना साकार कर दिया।
इस उपलब्धि की जानकारी मिलते ही रिश्तेदारों, मित्रों और क्षेत्रवासियों ने दोनों को शुभकामनाएं दीं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यह सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो कठिन परिस्थितियों के कारण अपने सपनों से समझौता कर लेते हैं। रामेश्वर बावरी और मनीष बावरी की यह सफलता साबित करती है कि आर्थिक अभाव कभी भी प्रतिभा और मेहनत के रास्ते की स्थायी बाधा नहीं बन सकते।
रामेश्वर बावरी वर्षों से परिवार के पालन-पोषण के लिए पत्थर तोड़ने जैसी कठिन मजदूरी करते रहे। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने शिक्षा का महत्व समझा और स्वयं पढ़ाई जारी रखने के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई भी नहीं रुकने दी। परिवार की जिम्मेदारियों और रोजमर्रा की कठिनाइयों के बीच भी उन्होंने सरकारी नौकरी पाने का सपना जीवित रखा।
पुत्र मनीष बावरी ने भी पिता के संघर्ष को अपनी प्रेरणा बनाया। सीमित संसाधनों के बावजूद नियमित अध्ययन और लगातार प्रयासों के दम पर उन्होंने भी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2025 में सफलता हासिल की। अंतिम चयन सूची में पिता और पुत्र दोनों के नाम आने से परिवार की वर्षों की मेहनत रंग लाई।
Updated on:
01 Jul 2026 03:07 pm
Published on:
01 Jul 2026 02:12 pm
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