जोधपुर

जोधपुर में युवाओं ने मेहनत व बुजुर्गों ने अनुभव की बूंदों से सींचा तो खिल उठा यह पार्क

- चौपासनी हाउसिंग बोर्ड 10 सेक्टर स्थित वैष्णो देवी पार्क

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Apr 01, 2018
चौपासनी हाउसिंग बोर्ड 10 सेक्टर स्थित वैष्णो देवी पार्क

चौपासनी (जोधपुर).

करीब एक साल पहले उजाड़ पड़े मां वैष्णों देवी पार्क को स्थानीय लोगों ने मेहनत से संवार लिया है। पहले जहां कचरा व गंदगी का आलम रहता था अब वहां सुगंधित खिले फूलों की महक आती है। इस पार्क में पहले जहां बच्चे आने से भी कतराते थे, अब वहां सुबह शाम बच्चों की हंसी ठिठोली गूंजती है। चौपासनी हाउसिंग बोर्ड के 10 सेक्टर स्थित मां वैष्णों देवी पार्क को यहां के युवाओं ने जहां मेहनत की बूंदों से सींचा है, वहीं बुजुर्गों ने अपने अनुभव से इसे तरासा है। इन सबके बाद बच्चों की मुस्कान ने इस पार्क के सौन्दर्य में चार चांद लगाए हैं। इस पार्क को संवारने में बंकेश सांखला, रविन्द्र गौराणा, ओम प्रकाश, भूपेन्द्र, सुरेन्द्र जैसे युवाओं ने मेहनत की है वहीं इसमें जीएल माथुर, मदनलाल आदि के साथ स्थानीय लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सालभर पहले वीरान पड़े पार्क को स्थानीय लोगों की जिंदादिली ने आबाद किया है।

सामूहिक प्रयासों से खिला उद्यान
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह पार्क आसपास रहने वालों के सामूहिक प्रयासों से निखरा है। इसमें क्षेत्र के युवाओं का विशेष योगदान रहा है। युवाओं ने ही सबसे पहले इस पार्क का सौन्दर्य निखारनें की पहल की थी। इसके बाद जब बुजुर्गों का सहयोग मिला तो सरकारी विभाग और जनप्रतिनिधियों ने भी मदद को हाथ बढाए। इसके बाद समय-समय पर स्थानीय लोगों ने आर्थिक या शारीरिक परिश्रम से मदद कर इसके सौन्दर्य को कायम रखा है।

होते हैं आध्यात्मिक व धार्मिक कार्यक्रम
पार्क में रोजाना सुबह शाम बच्चों, बुजुर्गों व महिलाओं की आवाजाही लगी रहती है। इसके अलावा यहां समय-समय पर आध्यात्मिक व धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी होता है। रविन्द्र गौराणा ने बताया कि यहां योगा क्लास, भागवद कथा सहित सुन्दर कांड आदि का पाठ भी करवाया गया। इसमें स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों के साथ आसपास की कई कॉलोनियों के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

ये है सुविधाएं
पार्क की लंबाई करीब 300 फीट और चौड़ाई 100 फीट के आसपास है। इसमें प्रवेश के लिए 6 गेट है। प्रवेश द्वार पर हरी बैल से आकर्षक डिजाइन बनाई गई है। पार्क के चारों ओर पक्की दीवार है। बैठने के लिए पत्थर की 15 बैंचें लगी हुई है। लोगों के घूमने के लिए टाइलों का पक्का भ्रमण पथ बना हुआ है। पक्षियों के दाना पानी के लिए छोटा चुग्गाघर भी बनाया है। नलकूप व पानी की टंकी के माध्यम से पानी की सप्लाई होती है। घास को पानी पिलाने के लिए भूमिगत पाइप लाइन डालकर 8 फ व्वारे लगाए गए हैं। आने वाले समय में यहां बूंद-बूंद ड्रिप सिंचाई प्रणाली, घास काटने की मशीन, वाटर कूलर लगाने, भजनों के लिए स्पीकर लगाने आदि की भी योजना है।

फूल व फलदार के साथ लगाए औषधीय पौधे
पार्क में हरी घास के साथ कई पेड़-पौधे लगाए गए हैं। इसमें फलों व फलदार पौधों के साथ कई औषधीय गुणों के पौधे भी लगाए गए हैं। इनमें आंवला, चीकू, टमाटर, बैल पत्र, केला, नारियल, अमर बैल, हजारा, बरगद, जामफल, बादाम, चमेली, मोगरा, चांदनी, अनार, आम, नीम, कनेर, अशोक आदि के पौधे लगाए गए है।

इनकी है दरकरार
पार्क में सार्वजनिक सभा भवन, वृद्धजनों के बैठने के लिए आरामदायक कुर्सियां, भंडारण कक्ष, बच्चों के लिए झूले, सार्वजनिक शौचालय आदि का अभाव है। इसके अलावा यहां बनी पानी की टंकी भी लीकेज होती है। इसके कारण पानी व्यर्थ बहता रहता है। इसको लेकर कई बार शिकायत भी की गई है लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।

इन्होंने कहा-
यह पार्क पहले उजाड़ था। युवाओं ने इस पार्क को संवारने का बेड़ा उठाया तो बुजुर्गों ने भी सहयोग किया। सभी के सामूहिक प्रयासों से आज मां वैष्णो देवी पार्क हराभरा हो गया है। इसमें दैनिक गतिविधियों के साथ समय-समय पर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी करवाया जाता है। अक्सर कामकाज के बाद वापस घर आने पर या छुट्टी के दिन लोग पार्क में आकर साफ-सफाई करते है- रविन्द्र गौराणा, क्षेत्रवासी।

हम रोजाना शाम को इस पार्क में खेलने के लिए आते हैं। अब गर्मियों की छुट्टियां आ गई हैं। ऐसे में सुबह शाम बच्चों की भीड़ रहती है। पार्क में हरी घास के साथ पेड़-पौधों से पार्क के सौन्दर्य में निखार आया है। यदि पार्क में झूले सहित बच्चों के खेलने के लिए अन्य सुविधाएं विकसित की जाएं तो बच्चों की संख्या बढ़ेगी। पार्क को संवारने में आसपास के सभी लोगों का योगदान रहा है- अक्षित,क्षेत्रवासी।

Published on:
01 Apr 2018 07:28 pm
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