
जोधपुर में आई आंधी के दौरान उठता धूल का गुबार (फोटो-पत्रिका)
जोधपुर। पश्चिमी राजस्थान में शनिवार शाम मौसम ने अचानक करवट ली और सूर्यनगरी जोधपुर ने इस सीजन के सबसे शक्तिशाली आंधी-तूफान का सामना किया। शाम करीब 7:15 बजे शहर में पहुंची काली-पीली आंधी ने दो घंटे तक कहर बरपाया। इस दौरान हवा की अधिकतम रफ्तार 98 किलोमीटर प्रतिघंटा दर्ज की गई। तेज हवाओं के साथ बारिश, बादलों की गर्जना और बिजली की चमक ने पूरे शहर को अपनी चपेट में ले लिया। आंधी के असर से न केवल जनजीवन प्रभावित हुआ, बल्कि जोधपुर डिस्कॉम का बिजली तंत्र भी बुरी तरह लड़खड़ा गया।
मौसम विभाग के अनुसार यह शक्तिशाली सिस्टम पश्चिमी विक्षोभ और पाकिस्तान से लेकर पश्चिमी राजस्थान तक पड़ रही भीषण गर्मी के संयुक्त प्रभाव से विकसित हुआ।
पिछले दिनों पाकिस्तान के सिंध प्रांत के जेकोकाबाद में तापमान 51 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जबकि राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में भी पारा 48 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया। अत्यधिक गर्मी और वातावरण में बनी अस्थिरता के कारण तेज आंधी और बारिश का यह सिस्टम तैयार हुआ, जिसका असर राजस्थान के कई हिस्सों में देखने को मिला।
आंधी के साथ बारिश शुरू होने से जोधपुरवासियों को भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत मिली। रात 8:30 बजे तक करीब 4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। ठंडी हवाओं के चलते महज तीन घंटे में तापमान 13 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। शाम 5:30 बजे जहां तापमान 38.2 डिग्री सेल्सियस था, वहीं रात 8:30 बजे यह घटकर 25.4 डिग्री सेल्सियस रह गया। मौसम विभाग ने अगले दो-तीन दिन तक मौसम के इसी तरह बने रहने और तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहने की संभावना जताई है।
हालांकि राहत लेकर आई इस बारिश और आंधी ने शहर में भारी नुकसान भी पहुंचाया। प्रतापनगर, जालोरी गेट, सरदारपुरा, रातानाडा, देवनगर, हाउसिंग बोर्ड और अन्य कई इलाकों में 50 से अधिक पेड़ उखड़ गए। कई होर्डिंग, बिजली के पोल और तार क्षतिग्रस्त हो गए। मथुरादास माथुर अस्पताल परिसर में एक विशाल पेड़ गिर गया, जबकि भीमजी का मोहल्ला क्षेत्र में एक दीवार ढह गई। गनीमत रही कि किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं मिली।
आंधी का सबसे बड़ा असर बिजली व्यवस्था पर पड़ा। जोधपुर डिस्कॉम के अनुसार जिले में 1000 से अधिक बिजली पोल धराशायी हो गए, जबकि शहर में ही 100 से ज्यादा पोल क्षतिग्रस्त हुए। सबसे अधिक नुकसान झालामण्ड क्षेत्र में हुआ, जहां 40 से अधिक पोल गिर गए। कई स्थानों पर पेड़ बिजली लाइनों पर गिरने से आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। शहर के कई हिस्सों में देर रात तक अंधेरा पसरा रहा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों की अनेक ढाणियों और गांवों में बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो गई है।
आंधी थमने के बाद डिस्कॉम की तकनीकी टीमें मरम्मत कार्य में जुट गईं। जोधपुर डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक डॉ. भंवरलाल ने बिजली व्यवस्था सुधार और उपभोक्ता संतुष्टि को लेकर अधिकारियों की सख्त समीक्षा बैठक ली। उन्होंने बिजली कटौती, ट्रांसफॉर्मर खराबी और अन्य फॉल्ट की सूचना पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उपभोक्ता शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण, ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता वृद्धि, नेटवर्क सुदृढ़ीकरण पर जोर दिया।
Updated on:
30 May 2026, 10:41 PM IST
Published on:
30 May 2026, 10:41 PM IST
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