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Jodhpur News: जोजरी-लूनी नदी प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 306 कपड़ा फैक्ट्री को बंद रखने के निर्देश, 2 सस्पेंड

Jojri-Luni Pollution: जोजरी-लूनी नदी में औद्योगिक प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अवैध पाइपलाइन से गंदा पानी छोड़े जाने के मामले में कोर्ट ने संबंधित उद्योगों और सीईटीपी को अस्थाई रूप से बंद रखने के निर्देश दिए हैं।

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Jojri Luni River Pollution

जोजरी नदी। फाइल फोटो- पत्रिका

जोधपुर। जोजरी-लूनी नदी तंत्र में प्रदूषण के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सख्त रुख अपनाते हुए मौखिक रूप से जोधपुर के औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले जहरीले-गंदे पानी के ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) से जुड़ी सभी 306 वस्त्र उद्योग इकाइयों सहित सीईटीपी को जांच और सुधारात्मक कार्रवाई पूरी होने तक बंद रखने के निर्देश दिए। कोर्ट ने जोजरी नदी में बिना उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट जल छोड़े जाने के लिए इस्तेमाल की जा रही करीब चार किलोमीटर लंबी अवैध भूमिगत पाइपलाइन मिलने पर गंभीर नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि आखिर यह सब होने किसने दिया।

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न्यायाधीश विक्रम नाथ और न्यायाधीश संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि इतनी बड़ी अवैध डिस्चार्ज प्रणाली सीईटीपी संचालकों, उद्योगों और नियामक एजेंसियों की जानकारी के बिना कैसे संचालित होती रही। खंडपीठ ने यह भी पूछा कि नदी की लगातार निगरानी के बावजूद राजस्थान सरकार और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्थानीय अधिकारी क्या कर रहे थे।

कार्रवाई शुरू, दो अधिकारी निलंबित

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने कहा कि 27 मई को समिति के निरीक्षण के दौरान अवैध डिस्चार्ज का मामला सामने आते ही सख्त कार्रवाई शुरू कर दी गई। उन्होंने कहा कि जयपुर से विशेष टीम तत्काल जोधपुर भेजी गई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दो अधिकारियों को निलंबित किया गया, वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला किया गया तथा आपराधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसमें रीजनल ऑफिसर कामिनी सोनगरा को एपीओ और लैब इंचार्ज देवेंद्र सिंह और एईई कुणाल खत्री को सस्पेंड किया गया है।

उन्होंने खंडपीठ को आश्वस्त किया कि मामले में एफआईआर दर्ज कर वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआइटी) गठित किया जाएगा, जो उद्योगों, सीईटीपी प्रबंधन और सरकारी अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच करेगा। शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार की पर्यावरणीय उल्लंघनों के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति है और राजस्थान की नदियों को पुनर्जीवित करना उसका कानूनी व नैतिक दायित्व है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल की अध्यक्ष अपर्णा अरोड़ा ने कहा कि मामले की जानकारी मिलते ही तत्काल कार्रवाई की गई और किसी भी अवैध औद्योगिक गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

वैज्ञानिक निस्तारण की आवश्यकता

खंडपीठ ने कहा कि अवैध डिस्चार्ज में शामिल नीचे से लेकर ऊपर तक प्रत्येक जिम्मेदार व्यक्ति की पहचान कर उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। कोर्ट ने समिति की रिपोर्टों का भी संज्ञान लिया, जिनमें जोजरी-बांडी-लूनी नदी तंत्र में व्यापक प्रदूषण, नदी तल में जमा विषैले स्लज और मानसून से पहले उसके वैज्ञानिक निस्तारण की तत्काल आवश्यकता जताई गई है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि समय रहते स्लज नहीं हटाया गया तो प्रदूषण कृषि भूमि, भूजल और आसपास के पर्यावरण तंत्र में और फैल सकता है। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि विस्तृत दिशा-निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।