गंभीर वारदातों में लिप्त होने वाल बच्चों की संख्या में लगातार हो रही बढ़ोतरी
संदीप हुड्डा/जोधपुर. कॉपी-किताब पकडऩे की जगह बच्चों के हाथ में चाकू-पिस्तौल। बेखौफ चोरी, डकैती, हत्या और बलात्कार जैसी वारदातों को अंजाम। जी हां, मासूमों में अपराधी की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। अपराध के दलदल में बचपन फंस रहा है। जिले में आपराधिक वारदातों में बच्चों के शामिल होने के आंकडे़ चौंकाने वाले हैं। पिछले तीन साल में शहर में ७०० मासूम विभिन्न आपराधिक वारदातों में पकड़े जा चुके हैं और उन्हें संप्रेषण गृह भेजा जा चुका है।
पुलिस महकमे के आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में पिछले तीन साल में ७०० बच्चे आपराधिक वारदातों में लिप्त पाए गए। इनमें कई तो लूट, हत्या और बलात्कार जैसी गंभीर वारदातों में शामिल थे। इतनी बड़ी संख्या में बच्चों का अपराध में शामिल होना चिंता का विषय है। बालकों को अपराध से बचाने के लिए व बाल कल्याण के लिए सरकार की कई एजेंसियां काम कर रही हैं। कई संगठनों को सरकार हर साल करोड़ों रुपए का बजट दे रही है।
जोधपुर पूर्व में सबसे ज्यादा बच्चे
जोधपुर जिले के अंतर्गत आने वाले पुलिस के तीनों जिलों में भी जोधपुर पूर्व में सबसे ज्यादा बच्चे पकड़े गए हैं। पूर्व जिले में ३०३ बच्चे आपराधिक वारदातों में पकड़े गए। जोधपुर पश्चिम में २२३ और ग्रामीण में १७४ बच्चे पकड़े गए।
गंभीर वारदातों में भी हैं शामिल
गंभीर अपराध करने वाले बच्चों की संख्या भी कम नहीं है। ४२ बच्चे तो लूट के अपराध में पकड़े गए इनमें से पूर्व में २१, पश्चिम में १९ व ग्रामीण में दो बच्चे शामिल थे। हत्या के मामलों में १२ बच्चे शामिल थे इनमें से ग्रामीण इलाके में ५,पश्चिम में ३ व पूर्व में ४ बच्चे थे। ग्रामीण में एक नाबालिग बच्चा डकैती में भी पकड़ा गया। बलात्कार के मामलों में १६ बच्चे पकड़े गए।